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Question
सामवेद के विषय में ५० शब्दों में लिखिए।
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Solution
सामवेद संहिता के दो भाग हैं- पूर्वार्चिक तथा उत्तरारचिंक। पूर्वार्चिक में आग्नेय, ऐन्द्र, पवमान तथा आरण्य-पर्व के रूप में मन्त्रों का विभाजन है। वस्तुत: इन देवताओं से सम्बद्ध मन्त्रों को पृथक्-पृथक् रखा गया है। उत्तराचिंक को दशरात्र, संवत्सर, एकाह आदि विषयों के अनुसार व्यवस्थित किया गया है। सामवेद में ग्रामगेय (स्वर-विशेष) गानों की संख्या सर्वाधिक है। आरण्यगान में संकटपूर्ण और वर्जित रागों को संकलित किया जाता था। इसलिए ये ग्रामों में नहीं गाए जाते थे। इन दोनों से सम्बद्ध क्रमश: ऊहगान और ऊह्गान हैं, जो यज्ञकार्यों में साम-मन्त्रों को क्रमबद्धता प्रदान करते हैं। इस प्रकार इसमें ये चार महत्त्वपूर्ण गान हैं - ग्राम, आरण्य, ऊह तथा ऊह्या।
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