Advertisements
Advertisements
Question
पूरक पाठ्य पुस्तक पर आधारित निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए -
'सपनों के से दिन' पाठ में बच्चों को स्कूल जाना बिल्कुल भी पसंद नहीं था, क्यों? कारण सहित उत्तर स्पष्ट करते हुए बताइए कि स्कूल जाने के संबंध में आपका क्या अनुभव है?
Advertisements
Solution
'सपनों के से दिन' पाठ में बच्चों को स्कूल जाने में रुचि नहीं थी क्योंकि उन्हें कक्षा कार्य और अध्यापक द्वारा सिखाए गए सबक याद नहीं होते थे। स्कूलों के बारे में मेरी राय है कि शारीरिक दंड पर रोक लगाना बहुत आवश्यक कदम है। बच्चों को विद्यालय में शारीरिक दंड से नहीं अपितु मानसिक संस्कार द्वारा अनुशासित करना चाहिए। प्रशंसा, निंदा, पुरस्कार इत्यादि से बच्चों का सम्मान करना उचित है। डर से बच्चा अपनी समस्याओं को नहीं बता पाता है। उसे स्नेह से समझाने से वह अनुशासित रहता है और ठीक से पढ़ाई करता है, नियमित रूप से स्कूल आता है और सफलता की ओर अग्रसर होता है।
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
कोई भी भाषा आपसी व्यवहार में बाधा नहीं बनती−पाठ के किस अंश से यह सिद्ध होता हैं?
स्काउट परेड करते समय लेखक अपने को महत्वपूर्ण 'आदमी' फ़ौजी जवान क्यों समझने लगता था?
लेखक के अनुसार उन्हें स्कूल खुशी से भागे जाने की जगह न लगने पर भी कब और क्यों उन्हें स्कूल जाना अच्छा लगने लगा?
विद्यार्थियों को अनुशासन में रखने के लिए पाठ में अपनाई गई युक्तियों और वर्तमान में स्वीकृत मान्यताओं के संबंध में अपने विचार प्रकट कीजिए।
प्राय: अभिभावक बच्चों को खेल-कूद में ज़्यादा रूचि लेने पर रोकते हैं और समय बरबाद न करने की नसीहत देते हैं बताइए −
खेल आपके लिए क्यों ज़रूरी हैं?
प्राय: अभिभावक बच्चों को खेल-कूद में ज़्यादा रूचि लेने पर रोकते हैं और समय बरबाद न करने की नसीहत देते हैं बताइए −
आप कौन से ऐसे नियम-कायदों को अपनाएँगे जिससे अभिभावकों को आपके खेल पर आपत्ति न हो?
‘बच्चों की यह स्वाभाविक विशेषता होती है कि खेल ही उन्हें सबसे अच्छा लगता है।’ सपनों के-से दिन नामक पाठ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
लेखक के बचपन के समय बच्चे पढ़ाई में रुचि नहीं लेते थे।-स्पष्ट कीजिए।
हेडमास्टर ने प्रीतमचंद के विरुद्ध क्या कार्यवाही की?
लेखक ने अपने विद्यालय को हरा-भरा बनाने के लिए किए गए प्रयासों का वर्णन किया है। इससे आपको क्या प्रेरणा मिलती है?
मास्टर प्रीतमचंद को स्कूल से क्यों निलंबित कर दिया गया? निलंबन के औचित्य और उस घटना से उभरने वाले जीवन-मूल्यों पर विचार कीजिए।
‘सपनों के-से दिन’ पाठ में हेडमास्टर शर्मा जी की, बच्चों को मारने-पीटने वाले अध्यापकों के प्रति क्या धारणा थी? जीवन-मूल्यों के संदर्भ में उसके औचित्य पर अपने विचार लिखिए।
‘सपनों के-से दिन’ पाठ के आधार पर बताइए कि बच्चों का खेलकूद में अधिक रुचि लेना अभिभावकों को अप्रिय क्यों लगता था? पढ़ाई के साथ खेलों का छात्र जीवन में क्या महत्त्व है और इससे किन जीवन-मूल्यों की प्रेरणा मिलती है?
लेखक गुरदयाल सिंह अपने छात्र जीवन में छुटटियों के काम को पुरा करने के लिए योजनाएँ तैयार करते थे। क्या आप की योजनाएँ लेखक की योजनाओं से मेल खाती हैं? उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
‘सपनों के - से दिन’ पाठ के आधार पर लिखिए कि लेखक को नयी श्रेणी में जाने की प्रसन्नता अन्य विद्यार्थियों की तरह क्यों नहीं होती थी?
पूरक पाठ्य-पुस्तक पर आधारित निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए:
'सपनों के-से दिन' पाठ में लेखक को बचपन में प्रकृति कैसी प्रतीत होती थी? उस समय लेखक फूलों के साथ कैसा व्यवहार करता था?
