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Question
निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
प्रातः नभ था बहुत नीला शंख जैसे
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Solution
प्रातः नभ था बहुत नीला शंख जैसे - उपमा अलंकार
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निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
मधुबन की छाती को देखो।
सूखी कितनी इसकी कलियाँ।
निम्न वाक्य में अलंकार पहचानकर बताइए :
संसार की समरस्थली में धीरता।
निम्नलिखित पंक्ती में उद्धृत अलंकार पहचान कर उसका नाम लिखिए:
हनुमंत की पूँछ में लग न पाई आग।
लंका सगरी जल गई, गए निशाचर भाग।।
निम्नलिखित उदाहरण के अलंकार पहचानकर लिखिए।
रघुबर बाल पतंग।।
निम्नलिखित उदाहरण के रस पहचानकर लिखिए।
कहूँ सुलगत कोउ चिता कहूँ कोड जात लगाई।
एक लगाई जात एक की राख बुझाई।
निम्नलिखित अलंकार पहचानकर उसका प्रकार और उप-प्रकार लिखिए:
| वाक्य | प्रकार | उप-प्रकार |
| कनक-कनक ते सौ गुनी, मादकता अधिकाय। जो खाए बौराय जग, जो पाए बौराय। |
“जिसके अरुण - कपोलों की मतवाली सुंदर छाया में।
अनुरागिनी उषा लेती थी निज सुहाग मधुमाया में।”
इन काव्य-पंक्तियों में प्रयुक्त अलंकार है -
“हनुमान की पूँछ में लगन पाई आग
लंका सिगरी जल गई गए निसावर भाग”
इस दोहे में निहित अलंकार है -
'जो रहीम गति दीप की कुल कपूत की सोय।
बारै उजियारों करै, बढ़ै अँधेरो होय।'
इस दोहे में प्रयुक्त अलंकार है -
स्तम्भ-I और स्तम्भ-II को उचित विकल्प से सुमेलित कीजिए -
| स्तम्भ-I | स्तम्भ-II | ||
| (I) | हेमकुंभ ले उषा सवेरे भरती ढुलकाती सुख मेरे। | (अ) | श्लेष अलंकार |
| (II) | हरिमुख मानो मधुर मयंक। | (ब) | उत्प्रेक्षा अलंकार |
| (III) | पानी गए न ऊबरै, मोती मानुष चून। | (स) | मानवीकरण अलंकार |
