Advertisements
Advertisements
Question
लखनवी अंदाज़’ पाठ में निहित संदेश स्पष्ट कीजिए।
Advertisements
Solution
पाठ का मुख्य संदेश यह है कि लखनऊ की तहज़ीब, शालीनता और नफ़ासत केवल बोलचाल में ही नहीं, बल्कि व्यवहार और बर्ताव में भी झलकती है। लखनवी अंदाज़ का अर्थ है, दूसरों के प्रति सम्मान, आत्म-संयम, विनम्रता और शिष्टाचार बनाए रखना, चाहे परिस्थिति कैसी भी हो।
लेख में ‘नवाब साहब’ का व्यवहार यह सिखाता है कि असली संस्कृति और सभ्यता दूसरों की भावनाओं का ध्यान रखते हुए अपने असंतोष या नापसंदगी को भी विनम्र ढंग से व्यक्त करना है। दिखावा, बड़प्पन, और व्यंग्य के साथ भी एक मीठा और मर्यादित लहजा बनाए रखना लखनवी अंदाज़ की खास पहचान है।
RELATED QUESTIONS
लेखक को नवाब साहब के किन हाव-भावों से महसूस हुआ कि वे उनसे बातचीत करने के लिए तनिक भी उत्सुक नहीं हैं?
किन-किन चीज़ों का रसास्वादन करने के लिए आप किस प्रकार की तैयारी करते हैं?
क्या सनक का कोई सकारात्मक रूप हो सकता है? यदि हाँ तो ऐसी सनकों का उल्लेख कीजिए।
‘लखनवी अंदाज़’ पाठ के आधार पर बताइए कि लेखक यशपाल ने यात्रा करने के लिए सेकंड क्लास का टिकट क्यों खरीदा?
लेखक के डिब्बे में आने पर नवाब ने कैसा व्यवहार किया?
खीरे को खाने योग्य बनाने के लिए नवाब साहब ने क्या-क्या किया और उन्हें किस तरह सजाकर रखा? पठित पाठ के आधार पर लिखिए।
खीरे की फाँकें खिड़की से फेंकने के बाद नवाब साहब ने गुलाबी आँखों से लेखक की ओर क्यों देखा?
नवाब साहब ने खीरे की फाँकों पर नमक-मिर्च छिड़का जिसे देखकर लेखक ललचाया पर उसने खीरे खाने का प्रस्ताव अस्वीकृत क्यों कर दिया?
बिना खीरा खाए नवाब साहब को डकार लेते देखकर लेकर क्या सोचने पर विवश हो गया?
सेकंड क्लास के डिब्बे की उन विशेषताओं का उल्लेख कीजिए जिनके कारण लेखक और नवाब साहब दोनों ने उसे यात्रा के लिए चुना।
‘लखनवी अंदाज़’ शीर्षक की सार्थकता तर्क सहित सिद्ध कीजिए।
‘लेखक की तुलना में नवाब साहब अधिक शिष्ट और सभ्य थे।’ ‘लखनवी अंदाज़’ पाठ के आधार पर सोदाहरण बताइए।
लेखक को देखकर नवाब साहब असहज क्यों हो गए? ‘लखनवी अंदाज’ पाठ के आधार पर लिखिए।
‘लखनवी अंदाज’ पाठ में लेखक ने नवाब साहब की किस प्रकार की सनक का परिचय दिया है? ऐसी सनक के क्या-क्या परिणाम हो सकते हैं? उदाहरण के साथ स्पष्ट कीजिए।
‘लखनवी अंदाज’ पाठ के आधार पर बताइए कि नवाब साहब को खीरे खाने की तैयारी करते देख लेखक ने क्या सोचा? उसके मन में कौन-सी इच्छा जगी और नवाब साहब के पूछने पर उसने खाने से क्यों मना कर दिया?
नवाब साहब ने खीरे का आनंद किस प्रकार उठाया?
