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लखनवी अंदाज़’ पाठ में निहित संदेश स्पष्ट कीजिए। - Hindi Course - A

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प्रश्न

लखनवी अंदाज़’ पाठ में निहित संदेश स्पष्ट कीजिए।

दीर्घउत्तर
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उत्तर

पाठ का मुख्य संदेश यह है कि लखनऊ की तहज़ीब, शालीनता और नफ़ासत केवल बोलचाल में ही नहीं, बल्कि व्यवहार और बर्ताव में भी झलकती है। लखनवी अंदाज़ का अर्थ है, दूसरों के प्रति सम्मान, आत्म-संयम, विनम्रता और शिष्टाचार बनाए रखना, चाहे परिस्थिति कैसी भी हो।

लेख में ‘नवाब साहब’ का व्यवहार यह सिखाता है कि असली संस्कृति और सभ्यता दूसरों की भावनाओं का ध्यान रखते हुए अपने असंतोष या नापसंदगी को भी विनम्र ढंग से व्यक्त करना है। दिखावा, बड़प्पन, और व्यंग्य के साथ भी एक मीठा और मर्यादित लहजा बनाए रखना लखनवी अंदाज़ की खास पहचान है।

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लखनवी अंदाज़
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पाठ 12: यशपाल - लखनवी अंदाज़ - अतिरिक्त प्रश्न

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi - Kshitij Part 2 Class 10
पाठ 12 यशपाल - लखनवी अंदाज़
अतिरिक्त प्रश्न | Q 14

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लेखक को नवाब साहब के किन हाव-भावों से महसूस हुआ कि वे उनसे बातचीत करने के लिए तनिक भी उत्सुक नहीं हैं?


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लेखक ने ऐसा क्या देखा कि उसके ज्ञान चक्षु खुल गए?


क्या सनक सकारात्मक भी हो सकती है? सकारात्मक सनक की जीवन में क्या भूमिका हो सकती है? सटीक उदाहरणों द्वारा अपने विचार प्रकट कीजिए।


‘लखनवी अंदाज़’ शीर्षक की सार्थकता तर्क सहित सिद्ध कीजिए।


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इच्छा होते हुए भी लेखक और नवाब साहब दोनों के खीरा न खाने का कारण ‘लखनवी अंदाज’ पाठ के आधार पर बताइए।


‘लखनवी अंदाज’ पाठ के आधार पर बताइए कि नवाब साहब को खीरे खाने की तैयारी करते देख लेखक ने क्या सोचा? उसके मन में कौन-सी इच्छा जगी और नवाब साहब के पूछने पर उसने खाने से क्यों मना कर दिया?


गद्य पाठ के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए -

नवाब साहब की झुठी शानों-शौकत और घमण्ड भरे व्यवहार को देखकर लेखक ने उनके साथ किस प्रकार का व्यवहार किया? 'लखनवी-अंदाज़' पाठ के आधार पर इसे साबित कीजिए।


नवाब साहब द्वारा बार-बार खीरा खाने का आग्रह किया जा रहा था, इसे लेखक ने कैसे टाला?


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