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प्रश्न
‘लखनवी अंदाज’ पाठ के आधार पर बताइए कि नवाब साहब को खीरे खाने की तैयारी करते देख लेखक ने क्या सोचा? उसके मन में कौन-सी इच्छा जगी और नवाब साहब के पूछने पर उसने खाने से क्यों मना कर दिया?
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उत्तर
नबाब साहब के व्यवहार को उनकी सनक कहा जा सकता है। ऐसी सनक बहुत लोगों में देखी जा सकती है, जो अपनी खानदानी रईसी को दिखाने की धुन रखते हैं। वे ऐसा ही दिखावे करते दिखाई देते है।
नवाबी लोग गरीबों की तरह खीरे पर नहीं टूटते बल्कि ऐसी छोटी चीजों को देखने और सूँघने मात्र से ही उनका पेट भर जाता है।
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किन-किन चीज़ों का रसास्वादन करने के लिए आप किस प्रकार की तैयारी करते हैं?
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नवाब साहब ने खीरे की फाँकों पर नमक-मिर्च छिड़का जिसे देखकर लेखक ललचाया पर उसने खीरे खाने का प्रस्ताव अस्वीकृत क्यों कर दिया?
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नवाब साहब के व्यवहार में अचानक कौन-सा बदलाव आया और क्यों?
लखनवी अंदाज़’ पाठ में निहित संदेश स्पष्ट कीजिए।
‘लेखक की तुलना में नवाब साहब अधिक शिष्ट और सभ्य थे।’ ‘लखनवी अंदाज़’ पाठ के आधार पर सोदाहरण बताइए।
‘नवाबी नस्ल’ से आप क्या समझते हैं? ‘लखनवी अंदाज’ पाठ के संदर्भ में लिखिए।
‘लखनवी अंदाज’ पाठ में लेखक ने नवाब साहब की किस प्रकार की सनक का परिचय दिया है? ऐसी सनक के क्या-क्या परिणाम हो सकते हैं? उदाहरण के साथ स्पष्ट कीजिए।
'नवाब साहब ने खीरे बाहर फेंक दिए' - आपकी दृष्टि में उनका यह व्यवहार कहाँ तक उचित है?
गद्य पाठ के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए -
नवाब साहब की झुठी शानों-शौकत और घमण्ड भरे व्यवहार को देखकर लेखक ने उनके साथ किस प्रकार का व्यवहार किया? 'लखनवी-अंदाज़' पाठ के आधार पर इसे साबित कीजिए।
