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प्रश्न
‘लखनवी अंदाज’ पाठ में लेखक ने नवाब साहब की किस प्रकार की सनक का परिचय दिया है? ऐसी सनक के क्या-क्या परिणाम हो सकते हैं? उदाहरण के साथ स्पष्ट कीजिए।
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उत्तर
‘लखनवी अंदाज’ पाठ में लेखक ने नवाब साहब की खीरा न खाने की सनक का परिचय दिया है। नवाबों की सनक और शौक यह रही हैं कि वे अपनी वस्तु और हैसियत को बढ़ा-चढ़ाकर ही दिखाते और बताते थे। बात-बात पर दिखावा करना और दूसरों को नीचा दिखाना यह उनके कुछ खास शौकों में से एक थे। सनक का कोई सकारात्मक रूप नहीं हो सकता, नकारात्मक परिणाम ही देखने को मिलते हैं। लेकिन मनुष्य अगर ठान ले या उसमें लगन हो तो वह बड़ी उपलब्धि भी हासिल कर सकता है। उदाहरणार्थ यदि हमारे मन में देश के लिए मर मिटने की सनक हो तो हम उसे नहीं रोक सकते, दान करने की सनक नहीं रोक सकते, राजा कर्ण को सर्वस्व त्यागने पर मजबूर कर दिया।
सनक के सकारात्मक प्रभाव भी देखे जा सकते है। खीरे के संबंध में नवाब साहब के व्यवहार को उनकी सनक कहा जा सकता हैं। ऐसी सनक बहुत-से लोगों में देखी जा सकती है, जो अपनी खानदानी रईसी को दिखाने की धुन रखते हैं। वे ऐसा ही दिखावा करते दिखाई देते हैं।
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आप इस निबंध को और क्या नाम देना चाहेंगे?
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'नवाब साहब ने खीरे बाहर फेंक दिए' - आपकी दृष्टि में उनका यह व्यवहार कहाँ तक उचित है?
गद्य पाठ के आधार पर निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 25-30 शब्दों में लिखिए:
क्या आपको नवाब साहब का व्यवहार सामान्य लगा? क्यों? युक्तियुक्त उत्तर दीजिए।
