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Question
क्या तुम भी कभी उँट-गाड़ी या ताँगे पर बैठे हो? कहाँ? खुद चढ़े थे या किसी ने बिठाया था?
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Solution
हाँ, मैं अपनी दादी के गाँव में ताँगे पर बैठा हूँ। मेरे पिता ने उस पर चढ़ने में मेरी मदद की थी।
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RELATED QUESTIONS
अपनी टीचर की मदद से चार-पाँच बाँसों को बाँध कर एक छोटा-सा पुल बनाओ। उस पर चल कर देखो।
- तुम्हें कैसा लगा?
- गिरे तो नहीं?

जूते या चप्पल पहन कर पुल पर चलना ज़्यादा आसान होगा या नंगे पैर? क्यों?
चित्र 1 और 2 को देखो। बच्चे कुँए से बाल्टी खींच रहे हैं।

- क्या दोनों चित्रों में अंतर बता सकते हो?
- इन दोनों में से किस तरह से खींचना आसान होगा – पुली (घिरनी) के साथ या बिना पुली के?
अपने आस-पास देखो। तुम कहाँ-कहाँ पुली का प्रयोग देखते हो? उनकी सूची बनाओ।


यह पुल बाँस के बने पुल से किस तरह अलग है?

तुमने देखा कैसे बच्चे अलग-अलग पुलों की मदद से उबड़-खाबड़ रास्ते और नदियों को पार करके स्कूल पहुँचते हैं।
उस पुल का चित्र कॉपी में बनाओ। पुल पर चलती ट्रेन, गाड़ियाँ, जानवर और लोग दिखाना मत भूलना।
क्या तुम्हें साइकिल चलानी आती है? यदि हाँ, तो किससे सीखी?

तुम ऐसी गाड़ी में बैठना पसंद करोगे? क्यों?
मैदान में या स्कूल में किसी खुली जगह पर सब बच्चे इकट्टे हो जाओ। अब नीचे दी गई स्थितियों में तुम कैसे चलोगे, करके दिखाओ।
- अगर ज़मीन एकदम गुलाब की पंखुड़ियों जैसी हो।
- अगर ज़मीन काँटों-भरे मैदान में बदल गई हो और आस-पास ऊँची-ऊँची घास हो।
- अगर ज़मीन ठंडी-ठंडी बर्फ से ढँक गई हो।
क्या हर बार तुम्हारी चाल बदली? चर्चा करो।
