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कवि को अपनी स्वर्गीया पत्नी की याद क्यों आई? - Hindi (Elective)

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Question

कवि को अपनी स्वर्गीया पत्नी की याद क्यों आई?

Answer in Brief
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Solution

कवि द्वारा अपनी पुत्री को विवाह के शुभ अवसर पर नव-वधू के रूप में देखकर अपनी स्वर्गीय पत्नी का स्मरण हो आया। दुल्हन के कपड़ों में उनकी पुत्री बहुत सुंदर प्रतीत हो रही है। उसके अंदर अपनी माँ की झलक दिखाई देती है। अपनी पत्नी के साथ मिलकर गायी गई कविताएँ उन्हें अपनी पुत्री सरोज के रूप में साकार होती दिखती है। वह सरोज को देखकर भाव-विभोर हो जाता है और उसे लगता है मानो उसकी पत्नी सरोज का रूप धारण कर सामने खड़ी हो। पुत्री को विवाह के समय शिक्षा देते समय भी कवि को अपनी पत्नी का स्मरण हो आता है। माँ विवाह के समय पुत्री को उसके सुखी गृहस्थ जीवन के लिए शिक्षा देती है परन्तु पत्नी की अनुपस्थिति में कवि को यह कार्य करना पड़ता है। ऐसे महत्वपूर्ण समय में पत्नी का अभाव उसे उसकी याद दिला देता है।
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सरोज स्मृति
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निम्नलिखित पंक्ति का अर्थ स्पष्ट कीजिए -

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भर जलद धरा को ज्यों अपार;
वे ही सुख-दुख में रहे न्यस्त,
तेरे हित सदा समस्त व्यस्त;
वह लता वहीं की, जहाँ कली
तू खिली, स्नेह से हिली, पली,
अंत भी उसी गोद में शरण
ली, मूँदे दृग वर महामरण!

मुझ भाग्यहीन की तू संबल
युग वर्ष बाद जब हुई विकल,
दुख ही जीवन की कथा रही
क्या कहूँ आज, जो नहीं कही!
हो इसी कर्म पर वज्रपात 
यदि धर्म, रहे नत सदा माथ।

(1) ‘भर जलद धरा को ज्यों अपार’ पंक्ति द्वारा प्रतिपादित किया गया है - (1)

(क) वैमनस्य
(ख) अनुभव
(ग) स्नेह
(घ) प्रकाश

(2) कवि स्वयं को भाग्यहीन कहकर क्या सिद्ध करना चाहते हैं? (1)

(क) मनचाही प्रसिद्धि न मिलना
(ख) सरोज की आर्थिक दशा
(ग) सरोज ही एकमात्र सहारा
(घ) पारिवारिक सदस्यों से बिछोह

(3) निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए - (1)

  1. कवि सरोज को शकुंतला के समान मानते थे।
  2. पुत्री सरोज की मृत्यु असमय हो गई थी।
  3. सरोज की मृत्यु अपनी ससुराल में हुई थी।

इन कथनों में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं -

(क) केवल (i)
(ख) (ii) और (iii)
(ग) केवल (ii)
(घ) (ii) और (iii)

(4) ‘हो इसी कर्म पर वज्रपात’ के माध्यम से कवि कहना चाहते हैं कि वह - (1)

(क) कष्टदायक जीवन के बाद धार्मिक बन रहे हैं।
(ख) मस्तक पर वज्रपात सहने का साहस कर रहे हैं।
(ग) समस्त जीवन दुख में ही व्यतीत करते रहे हैं।
(घ) प्रतिकूलताओं के आगे आत्मसमर्पण कर रहे हैं।

(5) दुख ही जीवन की कथा रही के माध्यम से प्रकट हो रही है - (1)

(क) शैशवावस्था
(ख) वृदूधावस्था
(ग) वियोगावस्था
(घ) विश्लेषणावस्था

(6) ‘क्या कहूँ आज, जो नहीं कही!’
पंक्ति के माध्यम से कवि की स्वाभाविक विशेषता बताने के लिए सूक्ति कहीं जा सकती है - (1)

(क) पर उपदेश कुशल बहुतेरे
(ख) बिथा मन ही राखो गोय
(ग) मुझसे बुरा न कोय
(घ) मन के हारे हार है


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