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Question
'आकाश बदल कर बना मही' में 'आकाश' और 'मही' शब्द किसकी ओर संकेत करते हैं?
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Solution
ये शब्द कवि की श्रृंगार से पूर्ण कल्पनाओं तथा उसकी पुत्री सरोज की ओर संकेत करते हैं। कवि के अनुसार वह अपनी कविताओं में श्रृंगार भाव से युक्त कल्पनाएँ किया करता था। जब उसने नव-वधु के रूप में अपनी पुत्री को देखा, तो उसे लगा जैसे उसकी पुत्री के सौंदर्य में वह कल्पनाएँ साकार हो गई हैं और धरती पर उतर आयी हैं। अत: आकाश को वह श्रृंगार भाव से युक्त कल्पनाएँ तथा मही के रूप में अपनी पुत्री सरोज की ओर संकेत करता है।
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|
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(1) ‘भर जलद धरा को ज्यों अपार’ पंक्ति द्वारा प्रतिपादित किया गया है - (1)
(क) वैमनस्य
(ख) अनुभव
(ग) स्नेह
(घ) प्रकाश
(2) कवि स्वयं को भाग्यहीन कहकर क्या सिद्ध करना चाहते हैं? (1)
(क) मनचाही प्रसिद्धि न मिलना
(ख) सरोज की आर्थिक दशा
(ग) सरोज ही एकमात्र सहारा
(घ) पारिवारिक सदस्यों से बिछोह
(3) निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए - (1)
- कवि सरोज को शकुंतला के समान मानते थे।
- पुत्री सरोज की मृत्यु असमय हो गई थी।
- सरोज की मृत्यु अपनी ससुराल में हुई थी।
इन कथनों में से कौन-सा/कौन-से कथन सही है/हैं -
(क) केवल (i)
(ख) (ii) और (iii)
(ग) केवल (ii)
(घ) (ii) और (iii)
(4) ‘हो इसी कर्म पर वज्रपात’ के माध्यम से कवि कहना चाहते हैं कि वह - (1)
(क) कष्टदायक जीवन के बाद धार्मिक बन रहे हैं।
(ख) मस्तक पर वज्रपात सहने का साहस कर रहे हैं।
(ग) समस्त जीवन दुख में ही व्यतीत करते रहे हैं।
(घ) प्रतिकूलताओं के आगे आत्मसमर्पण कर रहे हैं।
(5) दुख ही जीवन की कथा रही के माध्यम से प्रकट हो रही है - (1)
(क) शैशवावस्था
(ख) वृदूधावस्था
(ग) वियोगावस्था
(घ) विश्लेषणावस्था
(6) ‘क्या कहूँ आज, जो नहीं कही!’
पंक्ति के माध्यम से कवि की स्वाभाविक विशेषता बताने के लिए सूक्ति कहीं जा सकती है - (1)
(क) पर उपदेश कुशल बहुतेरे
(ख) बिथा मन ही राखो गोय
(ग) मुझसे बुरा न कोय
(घ) मन के हारे हार है
