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किसी LC परिपथ में 20 mH का एक प्रेरक तथा 50 uF का एक संधारित्र है जिस पर प्रारम्भिक आवेश 10 mC है। परिपथ का प्रतिरोध नगण्य है। मान लीजिए कि वह क्षण जिस पर परिपथ बन्द किया जाता है t = 0 है। - Physics (भौतिक विज्ञान)

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Question

किसी LC परिपथ में 20 mH का एक प्रेरक तथा 50 uF का एक संधारित्र है जिस पर प्रारम्भिक आवेश 10 mC है। परिपथ का प्रतिरोध नगण्य है। मान लीजिए कि वह क्षण जिस पर परिपथ बन्द किया जाता है t = 0 है।

  1. प्रारम्भ में कुल कितनी ऊर्जा संचित है? क्या यह LC दोलनों की अवधि में संरक्षित है?
  2. परिपथ की मूल आवृत्ति क्या है?
  3. किस समय पर संचित ऊर्जा ।
    1. पूरी तरह से विद्युत है (अर्थात वह संधारित्र में संचित है)?
    2. पूरी तरह से चुम्बकीय है (अर्थात प्रेरक में संचित है)?
  4. किन समयों पर सम्पूर्ण ऊर्जा प्रेरक एवं संधारित्र के मध्य समान रूप से विभाजित है?
  5. यदि एक प्रतिरोधक को परिपथ में लगाया जाए तो कितनी ऊर्जा अन्ततः ऊष्मा के रूप में क्षयित होगी?
Numerical
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Solution

दिया है, L = 20 × 10-3 H, C = 50 × 10-6 F, Q0 = 10 × 10-3 C

(a) प्रारम्भ में कुल संचित ऊर्जा

E = `1/2 "Q"_0^2/"C" + 1/2 "Li"_0^2 = 1/2 xx (10 xx 10^-3)^2/(50 xx 10^-6)` = 1.0 J   [∵ i0 = 0]

∵ परिपथ में शुद्ध प्रतिरोध नहीं लगा है; अतः परिपथ की कुल ऊर्जा संरक्षित है।

(b) परिपथ की मूल आवृत्ति

`omega_"r" = 1/sqrt"LC" = 1/(sqrt(20 xx 10^-3 xx 50 xx 10^-6))` = 1000 rad s-1

`therefore "v" = omega_"r"/(2pi) = 1000/(2 xx 3.14)` = 159 Hz

(c) संधारित के निरवेशन समीकरण Q = Q0 cos ωt से,

आवेश Q महत्तम अर्थात Qmax = ± Q0 होगा। 

जबकि t = 0, "T"/2, "T", "3T"/2, ...` आदि    (∵ cos ωt = ± 1)

इन क्षणों पर धारा i शून्य होगी। 

इसके विपरीत आवेश Q शून्य होगा, यदि

cos ωt = 0  `=> "t" = "T"/4, "3T"/4, "5T"/4,....`

इन क्षणों पर धारा i महत्तम होगी।

अतः (i) क्षणों t = 0, `"T"/2, "T", "3T"/2,...` आदि पर कुल ऊर्जा विद्युतीय होगी अर्थात संधारित्र में संचित होगी।

(ii) क्षणों t = `"T"/4, "3T"/4, "5T"/4,...` आदि पर कुल ऊर्जा चुम्बकीय होगी अर्थात प्रेरक में संचित होगी।

जहाँ T = `1/"v" = 1/159` = 0.0063 s

(d) प्रारम्भ में परिपथ की कुल ऊर्जा E = `"Q"_0^2/(2"C")`

यदि किसी समय t पर संधारित पर आवेश Q है तथा कुल ऊर्जा संधारित व प्रेरक में आधी-आधी बँटी है, तब 

इस क्षण संधारित की ऊर्जा या = `1/2`E

`=> 1/2 "Q"^2/"C" = 1/2 ("Q"_0^2)/"2C"`

`=> "Q"^2 = 1/2 "Q"_0^2`

`=> ("Q"_0 cos  omega"t")^2 = 1/2 "Q"_0^2`

`=> cos omega "t" = 1/sqrt2 = cos pi/4` या `omega "t" = pi/4`

`=> (2pi)/"T"  "t" = pi/4`

`=> "t" = "T"/8`

अतः व्यापक रूप में, t = `"T"/8, "3T"/8, "5T"/8, "7T"/8, ...` आदि समयों पर कुल ऊर्जा संधारित व प्रेरक में बराबर-बराबर बँटी होगी।

(e) यदि परिपथ में प्रतिरोध जोड़ दिया जाए तो धीरे-धीरे परिपथ की सम्पूर्ण ऊर्जा प्रतिरोधक में ऊष्मा के रूप में व्यय हो जाएगी।

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