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Question
कविता में व्यक्त दुख के कारणों को स्पष्ट कीजिए।
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Solution
- बीती स्मृतियों का स्मरण - मनुष्य बीते सुखों के पलों में खोया रहता है। इससे उसके वर्तमान में चल रहे संघर्ष के क्षणों को काटना दुखदाई होता है क्योंकि वह इसकी तुलना अपनी सुखद स्मृतियों से करता है। जो मनुष्य के लिए कष्टकारी है और दुख का कारण भी।
- यश, धन एवं सम्मान की चाह - मनुष्य अपने जीवन में यश, धन व सम्मान को पाने के लिए प्रयत्नशील रहता है। यदि वह यह सब प्राप्त नहीं कर पाता तो दुखी होकर भटकता रहता है। इन सब की चाह भी उसके दुख का कारण है।
- प्रभुता की इच्छा - व्यक्ति प्रभुता या बड़प्पन में उलझकर स्वयं को दुखी करता है।
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भाव स्पष्ट कीजिए -
प्रभुता का शरण-बिंब केवल मृगतृष्णा है,
हर चंद्रिका में छिपी एक रात कृष्णा है।
'छाया' शब्द यहाँ किस संदर्भ में प्रयुक्त हुआ है? कवि ने उसे छूने के लिए मना क्यों किया है?
कविता में विशेषण के प्रयोग से शब्दों के अर्थ में विशेष प्रभाव पड़ता है, जैसे कठिन यथार्थ। कविता में आए ऐसे अन्य उदाहरण छाँटकर लिखिए और यह भी लिखिए कि इससे शब्दों के अर्थ में क्या विशिष्टता पैदा हुई?
'मृगतृष्णा' किसे कहते हैं, कविता में इसका प्रयोग किस अर्थ में हुआ है?
'बीती ताहि बिसार दे आगे की सुधि ले' यह भाव कविता की किस पंक्ति में झलकता है?
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‘क्या हुआ जो खिला फूल रस-बसंत जाने पर?’ कवि का मानना है कि समय बीत जाने पर भी उपलब्धि मनुष्य को आनंद देती है। क्या आप ऐसा मानते हैं? तर्क सहित लिखिए।
कवि ‘छाया’ छूने से क्यों मना करता है?
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‘जितना ही दौड़ा तू उतना ही भरमाया’ के माध्यम से कवि क्या कहना चाहता है?
‘हर चंद्रिका में छिपी एक रात कृष्णा है’ पंक्ति में कवि हमें किस यथार्थ एवं सत्य से अवगत कराना चाहता है?
कविता में यथार्थ स्वीकारने की बात क्यों कही गई है?
'छाया मत छूना’ कविता के माध्यम से कवि क्या संदेश देना चाहता है?
अथवा
‘छाया मत छूना’ कविता का प्रतिपाद्य स्पष्ट कीजिए।
