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कवयित्री ने ‘जलमय सागर’ किसे कहा है? उसका हृदय क्यों जलता है?

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Question

कवयित्री ने ‘जलमय सागर’ किसे कहा है? उसका हृदय क्यों जलता है?

Short/Brief Note
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Solution

कवयित्री ने जलमय सागर उन प्राणियों को कहा है जिनका मन रूपी सागर ईर्ष्या, तृष्णा, मोह आदि की सांसारिकता से लबालब भरा हुआ है और आध्यात्मिक आस्था का अभाव है। इसके अभाव में मन इधर-उधर भटकता हुआ सांसारिकता में डूबा रहता है। आस्थाहीन प्राणियों का मन ई और तृष्णा की आग में जलता रहता है।

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मधुर-मधुर मेरे दीपक जल
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ये सभी कविताएँ ‘सन्धिनी’ में संकलित हैं।


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मेरी निश्वासों से द्रुततर,
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मैं अँचल की ओट किए हूँ,
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सहज-सहज मेरे दीपक जल !

पद्यांश की प्रथम पाँच पंक्‍तियों का सरल अर्थ लिखिए।


‘भारतीय त्‍योहारों में वैज्ञानिक दृष्‍टिकोण निहित हैं’ इस संदर्भ मे अंतरजाल से जानकारी प्राप्त कीजिए।


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