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कवयित्री ने ‘जलमय सागर’ किसे कहा है? उसका हृदय क्यों जलता है?

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प्रश्न

कवयित्री ने ‘जलमय सागर’ किसे कहा है? उसका हृदय क्यों जलता है?

टीपा लिहा
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उत्तर

कवयित्री ने जलमय सागर उन प्राणियों को कहा है जिनका मन रूपी सागर ईर्ष्या, तृष्णा, मोह आदि की सांसारिकता से लबालब भरा हुआ है और आध्यात्मिक आस्था का अभाव है। इसके अभाव में मन इधर-उधर भटकता हुआ सांसारिकता में डूबा रहता है। आस्थाहीन प्राणियों का मन ई और तृष्णा की आग में जलता रहता है।

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मधुर-मधुर मेरे दीपक जल
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