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‘कनुप्रिया’ काव्य का रसास्वादन कीजिए । - Hindi

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Question

‘कनुप्रिया’ काव्य का रसास्वादन कीजिए ।

Answer in Brief
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Solution

(१) रचना का शीर्षक : कनुप्रिया। (विशेष अध्ययन के लिए)

(२) रचनाकार : डॉ. धर्मवीर भारती।

(३) कविता की केंद्रीय कल्पना : इस कविता में राधा और कृष्ण के तन्मयता के क्षणों के परिप्रेक्ष्य में कृष्ण को महाभारत युद्ध के महानायक के रूप में तौला गया है। राधा कृष्ण के वर्तमान रूप से चकित है। वह उनके नायकत्व रूप से अपरिचित है। उसे तो कृष्ण अपनी तन्मयता के क्षणों में केवल प्रणय की बातें करते दिखाई देते हैं।

(४) रस-अलंकार : - -

(५) प्रतीक विधान : राधा कनु को संबोधित करते हुए कहती है कि मेरे प्रेम को तुमने साध्य न मानकर साधन माना है। इस लीला क्षेत्र से युद्ध क्षेत्र तक की दूरी तटा करने के लिए तुमने मुझे ही सेतु बना दिया। यहाँ लीला क्षेत्र और युद्ध क्षेत्र को जोड़ने के लिए सेतु जैसे प्रतीक का प्रयोग किया गया है।

(६) कल्पना : प्रस्तुत काव्य-रचना में राधा और कृष्ण के प्रेम और महाभारत के युद्ध में कृष्ण की भूमिका को अवचेतन मन वाली राधा के दृष्टिकोण से चित्रित किया गया है।

(६) पसंद की पंक्तियाँ तथा प्रभाव : दुख क्यों करती है पगली, क्या हुआ जो/कनु के वर्तमान अपने/तेरे उन तन्मय क्षणों की कथा से अनभिज्ञ हैं उदास क्यों होती है नासमझ/कि इस भीड़भाड़ में| तू और तेरा प्यार नितांत अपरिवर्तित/छूट गए हैं।
गर्व कर बावरी/कौन है जिसके महान प्रिय की/अठारह अक्षौहिणी सेनाएँ हों?
इन पंक्तियों में राधा को अवचेतन मन वाली राधा सांत्वना देती है।

(८) कविता पसंद आने का कारण : कवि ने इन पंक्तियों में राधा के अवचेतन मन में बैठी राधा के द्वारा चेतनावस्था में स्थित राधा को यह सांत्वना दिलाई है कि यदि कृष्ण युद्ध की हड़बड़ाहट में तुमसे और तुम्हारे प्यार से अपरिचित होकर तुमसे दूर चले गए हैं तो तुम्हें उदास नहीं होना चाहिए।
तुम्हें तो इस बात पर गर्व होना चाहिए। क्योंकि किसके महान प्रेमी के पास अठारह अक्षौहिणी सेनाएँ हैं। केवल तुम्हारे प्रेमी के पास ही न।

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रसास्वादन
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Chapter 13: कनुप्रिया - स्वाध्याय [Page 78]

APPEARS IN

Balbharati Hindi Yuvakbharati [English] Standard 12 Maharashtra State Board
Chapter 13 कनुप्रिया
स्वाध्याय | Q ४. | Page 78

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