Advertisements
Advertisements
Question
कार्य कुशलता पर जाति प्रथा का प्रभाव विषय पर समूह में चर्चा कीजिए। चर्चा के दौरान उभरने वाले बिंदुओं को लिपिबद्ध कीजिए।
Long Answer
Advertisements
Solution
कार्य कुशलता पर जाति प्रथा का प्रभाव
- जाति प्रथा का कार्य-कुशलता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
- यह आवश्यक नहीं है कि किसी विशेष जाति के माता-पिता का पेशा उनकी संतानों के लिए भी उपयुक्त हो।
- प्रत्येक व्यक्ति में अपनी अलग जन्मजात योग्यता और क्षमता होती है।
- कोई भी व्यक्ति अपनी रुचि और योग्यता के अनुसार अलग-अलग पेशा अपना सकता है।
- जाति प्रथा के आधार पर पेशा तय करना व्यक्ति की प्रतिभा को सीमित कर देता है।
- इससे योग्य व्यक्तियों की क्षमता का उचित उपयोग नहीं हो पाता।
- यह व्यवस्था लोगों के विकास और कार्य-कुशलता में बाधा उत्पन्न करती है।
- इसलिए व्यक्ति को अपनी योग्यता और रुचि के अनुसार पेशा चुनने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
shaalaa.com
श्रम विभाजन और जाति-प्रथा
Is there an error in this question or solution?
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
जाति प्रथा को श्रम-विभाजन का ही एक रूप न मानने के पीछे आंबेडकर के क्या तर्क हैं?
जाति-प्रथा भारतीय समाज में बेरोजगारी व भुखमरी का भी एक कारण कैसे बनती जा रही है? क्या यह स्थिति आज भी है?
लेखक के मत से 'दासता' की व्यापक परिभाषा क्या है?
शारीरिक वंश-परंपरा और सामाजिक उत्तराधिकार की दृष्टि से मनुष्यों में असमानता संभावित रहने के बावजूद आंबेडकर ‘समता’ के एक व्यवहार्य सिद्धांत मानने का आग्रह क्यों करते हैं? इसके पीछे उनके क्या तर्क हैं?
सही में आंबेडकर ने भावनात्मक समत्व की मानवीय दृष्टि के तहत जातिवाद का उन्मूलन चाहा है, जिसका प्रतिष्ठा के लिए भौतिक स्थितियों और जीवन-सुविधाओं का तर्क दिया गया है। क्या इससे आप सहमत हैं?
आंबेडकर ने जाति प्रथा के भीतर पेशे के मामले में लचीलापन न होने की जो बात की है- उस संदर्भ में शेखर जोशी की कहानी ‘गलता लोहा’ पर पुनर्विचार कीजिए।
जाति प्रथा को श्रम विभाजन का ही एक अंग न मानने के पीछे डॉ. आंबेडकर के क्या तर्क थे?
