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आंबेडकर ने जाति प्रथा के भीतर पेशे के मामले में लचीलापन न होने की जो बात की है- उस संदर्भ में शेखर जोशी की कहानी ‘गलता लोहा’ पर पुनर्विचार कीजिए।

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Question

आंबेडकर ने जाति प्रथा के भीतर पेशे के मामले में लचीलापन न होने की जो बात की है- उस संदर्भ में शेखर जोशी की कहानी ‘गलता लोहा’ पर पुनर्विचार कीजिए।
Very Long Answer
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Solution

शेखर जोशी की कहानी ‘गलता लोहा’ अनेक सामाजिक मुद्दों पर प्रकाश डालती है। इसमें दो बालकों का वर्णन है - एक धनराम, जो लोहार जाति से संबंधित है, और दूसरा मोहन, जो ब्राह्मण परिवार से है। कहानी में मास्टर धनराम को पढ़ाई के योग्य नहीं समझते और यह धारणा बना लेते हैं कि लोहार का बेटा होने के कारण शिक्षा उसके लिए नहीं है। वे यह विचार धनराम के मन में भी बैठा देते हैं, जिसके कारण वह शिक्षा प्राप्त नहीं कर पाता और उसे अपने पारंपरिक लोहार कार्य को ही अपनाना पड़ता है। यह कठोर दृष्टिकोण ही उसके विकास में बाधा बनता है। आंबेडकर जी के विचार भी इसी बात का समर्थन करते हैं कि यदि धनराम को उचित अवसर और मार्गदर्शन मिलता, तो वह अपने पारंपरिक पेशे से बाहर निकलकर अन्य व्यवसाय भी अपना सकता था। वहीं मोहन परिस्थिति के कारण लोहार का कार्य करने के लिए बाध्य हो जाता है।

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श्रम विभाजन और जाति-प्रथा
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Chapter 15: बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर (श्रम विभाजन और जाति-प्रथा, मेरी कल्पना का आदर्श समाज) - अभ्यास [Page 126]

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NCERT Hindi Aaroh Bhag 2 Class 12
Chapter 15 बाबा साहेब भीमराव आंबेडकर (श्रम विभाजन और जाति-प्रथा, मेरी कल्पना का आदर्श समाज)
अभ्यास | Q 1. | Page 126

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