Advertisements
Advertisements
Question
कार्ल मार्क्स का द्वंद्व सिद्धांत अथवा वर्गवाद स्पष्ट कीजिए।
Advertisements
Solution
उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में जर्मनी के कार्ल मार्क्स ने द्वंद्व सिद्धांत प्रतिपादित किया। उसके मतानुसार -
- इतिहास अमूर्त कल्पनाओं का नहीं, बल्कि जीवित मनुष्यों का होता है।
- मूलभूत आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु उपलब्ध उत्पादन साधनों के स्वरूप और स्वामित्व पर मनुष्यों के आपसी संबंध निर्भर करते हैं।
- समाज के सभी सदस्यों को समान मात्रा में उत्पादन के साधन प्राप्त नहीं होते। उत्पादन संसाधनों के असमान वितरण के कारण समाज में वर्ग आधारित विषम विभाजन उत्पन्न होता है, जिससे वर्ग संघर्ष शुरू होता है।
- उत्पादन साधनों पर अधिकार रखने वाला वर्ग अन्य वर्गों का आर्थिक शोषण करता है।
मानव इतिहास, वास्तव में, वर्ग संघर्ष का इतिहास है।
RELATED QUESTIONS
______ को आधुनिक इतिहास लेखन का जनक कहा जाता है।
‘आर्कओलॉजी ऑफ नॉलेज’ ग्रंथ ________ द्वारा लिखा गया है।
निम्न अवधारणाओं को स्पष्ट कीजिए।
द्वंद्ववाद
निम्न अवधारणाओं को स्पष्ट कीजिए।
एनल्स प्रणाली
निम्न कथन को कारण सहित स्पष्ट कीजिए।
स्त्रियों के जीवन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार करने वाले अनुसंधान कार्य प्रारंभ हुए।
स्त्रीवादी इतिहास लेखन किसे कहते हैं?
लियोपॉल्ड वॉन रांके के इतिहास विषयक दृष्टिकोण को स्पष्ट कीजिए।
संक्षिप्त टिप्पणि लिखिए:
वोलटेयिर
निम्न में से असत्य जोड़ी पहचानकर उसे सुधारिए और पुन: लिखिए:
"मानव का इतिहास वर्ग संघर्ष का इतिहास है'' यह मत ______ इस विचारक ने प्रस्तुत किया।
