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झूलन ने झुम्पा को नींबू के रस की कुछ बूँदें चखाईं। क्या कुछ बूँदों से स्वाद का पता चल सकता है? - Environmental Studies (पर्यावरण अध्ययन)

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Question

झूलन ने झुम्पा को नींबू के रस की कुछ बूँदें चखाईं। क्या कुछ बूँदों से स्वाद का पता चल सकता है?

One Line Answer
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Solution

हाँ, खट्टे की कुछ बूंद से ही स्वाद का पता चल जाता है।

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चखने से पचने तक
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Chapter 3: चखने से पचने तक - चर्चा करो और लिखो [Page 23]

APPEARS IN

NCERT Environmental Studies - Looking Around [Hindi] Class 5
Chapter 3 चखने से पचने तक
चर्चा करो और लिखो | Q 3 | Page 23

RELATED QUESTIONS

अलग-अलग स्वाद की कुछ चीज़ें इकट्ठी करो और अपने साथी के साथ झूलन और झुम्पा की तरह खेल खेलो। अपने साथी को चीज़ें चखाओ और पूछो - 

जीभ के कौन-से हिस्से में स्वाद ज़्यादा पता चल रहा था - आगे, पीछे, बाईं या दाईं तरफ़?


चबाकर या चबा-चबाकर खाओ - दोनों में अंतर बताओ।

सब मिलकर कक्षा में यह गतिविधि करो। ब्रेड या रोटी का टुकड़ा या पके हुए चावल लो।

  • पहले रोटी का टुकड़ा या कुछ चावल मुँह में डालो और तीन-चार बार चबाकर निगल जाओ।
  • क्या चबाने से स्वाद में बदलाव आया?
  • अब रोटी का टुकड़ा या कुछ चावल मुँह में डालो और 30-32 बार चबाओ।
  • क्या देर तक चबाने से स्वाद में बदलाव आया?

जब तुम कोई सख्त चीज़ - जैसे अमरूद, खाते हो तो उसे मुँह में डालने से लेकर निगलने तक कौन-से बदलाव आते हैं और कैसे?


तुम्हें याद होगा कि तुमने चौथी कक्षा में नमक-चीनी का घोल बनाया था। नीतू के पिताजी ने भी उसे यही घोल दिया। सोचो, उल्टी-दस्त होने पर यह घोल क्यों देते होंगे?


क्या तुम्हें या तुम्हारे घर में कभी किसी को ग्लूकोज़ चढ़ाया गया है? कब और क्यों? उसके बारे में अपने साथियों को बताओ।


क्या तुमने कभी ग्लूकोज़ चखा है? उसका स्वाद कैसा होता है? अपने साथियों को बताओ।


नीतू की टीचर उसे हॉकी खेलते समय बीच-बीच में ग्लूकोज़ पीने को कहती हैं। सोचो, वह खेल के दौरान ग्लूकोज़ क्यों पीती होगी?


तुम्हें क्या लगता है, रश्मि पूरे दिन में एक ही रोटी क्यों खाती होगी?


क्या कैलाश को खेल-कूद में दिलचस्पी होगी?


क्या तुम किसी ऐसे बच्चे को जानते हो जिसे दिनभर में खाने को कुछ नहीं मिलता? इसके क्या-क्या कारण हो सकते हैं?


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