Advertisements
Advertisements
Question
अलग-अलग स्वाद की कुछ चीज़ें इकट्ठी करो और अपने साथी के साथ झूलन और झुम्पा की तरह खेल खेलो। अपने साथी को चीज़ें चखाओ और पूछो -
कुछ खाने की चीज़ों को मुँह के किसी और हिस्से पर रखो-होंठ, तालू, जीभ के नीचे। क्या कहीं और भी स्वाद का पता चला?
Advertisements
Solution
नहीं, स्वाद का पता कहीं और नहीं चलता है।
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
तुम्हें एक ही तरह का स्वाद पसंद है या अलग-अलग? क्यों?
अगर कोई हम से पूछे कि कच्चे आँवले या खीरे का क्या स्वाद है तो हमें सोचना पड़ेगा।
तुम खाने की इन चीज़ों, जैसे - टमाटर, प्याज़, सौंफ़, लौंग, आदि का क्या स्वाद बताओगे?
चबाकर या चबा-चबाकर खाओ - दोनों में अंतर बताओ।
सब मिलकर कक्षा में यह गतिविधि करो। ब्रेड या रोटी का टुकड़ा या पके हुए चावल लो।
- पहले रोटी का टुकड़ा या कुछ चावल मुँह में डालो और तीन-चार बार चबाकर निगल जाओ।
- क्या चबाने से स्वाद में बदलाव आया?
- अब रोटी का टुकड़ा या कुछ चावल मुँह में डालो और 30-32 बार चबाओ।
- क्या देर तक चबाने से स्वाद में बदलाव आया?
जब तुम कोई सख्त चीज़ - जैसे अमरूद, खाते हो तो उसे मुँह में डालने से लेकर निगलने तक कौन-से बदलाव आते हैं और कैसे?
तुम्हें कैसे पता चलता है कि तुम्हें भूख लगी है?
सोचो, अगर तुम दो दिन तक कुछ भी न खाओ तो क्या होगा?
तुम्हें याद होगा कि तुमने चौथी कक्षा में नमक-चीनी का घोल बनाया था। नीतू के पिताजी ने भी उसे यही घोल दिया। सोचो, उल्टी-दस्त होने पर यह घोल क्यों देते होंगे?
क्या तुमने कभी 'ग्लूकोज़' शब्द सुना है या लिखा हुआ देखा है? कहाँ?
क्या कैलाश को खेल-कूद में दिलचस्पी होगी?
तुम्हारे हिसाब से रश्मि और कैलाश का खाना ठीक क्यों नहीं है? लिखो।
