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Question
इस कहानी में हमारी व्यवस्था पर जो व्यंग्य किया गया है, उसे स्पष्ट कीजिए।
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Solution
इस कहानी में लेखक ने हमारी शासन व्यवस्था पर तीखा व्यंग्य किया है। हमारी व्यवस्था बाहर से न्यायप्रिय, शांतिपूर्ण और अहिंसावादी दिखाई देती है, लेकिन यह रूप तभी तक रहता है जब तक लोग उसके बनाए नियमों का पालन करते हैं। जैसे ही लोग अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाते हैं या उसकी कार्यप्रणाली पर सवाल करते हैं, वह अपना वास्तविक रूप दिखाने लगती है और विरोध करने वालों को दबाने का प्रयास करती है, जब तक कि उनकी आवाज़ पूरी तरह शांत न हो जाए।
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