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Question
गद्य खंड पर आधारित निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में दीजिए -
| ‘बड़े भाई साहब’ कहानी का बड़ा भाई शिक्षा को ‘रटंत ज्ञान’ और ‘बे-सिर-पैर की बातें’ मानता है जिनका व्यावहारिक जीवन में कोई अर्थ नहीं, इस संदर्भ में आपके क्या विचार हैं? तर्कपूर्ण उत्तर दीजिए। |
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Solution
शिक्षा को बोझ के रूप में नहीं, सहज रूप में लेना उचित है। बच्चों को पुस्तकों से रटने की जगह समझने की प्रेरणा देनी चाहिए। यह समझी हुई बातें उन्हें दिमाग में स्थायी रूप से रखती हैं। पढ़ाई के साथ-साथ खेल भी महत्वपूर्ण है, व्यक्तित्व विकास के लिए। शिक्षा प्रणाली में अंग्रेजी के साथ अन्य विषयों को भी समर्थित करना चाहिए। विभिन्न पहलुओं के साथ बालकों के संपूर्ण विकास के लिए विशेष ध्यान देना जरूरी है।
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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक-दो पंक्तियों में दीजिए -
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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए -
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निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर (50-60 शब्दों में) लिखिए:
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निम्नलिखित के आशय स्पष्ट कीजिए −
बुनियाद ही पुख्ता न हो तो मकान कैसे पायेदार बने?
शिक्षा रटंत विद्या नहीं है-इस विषय पर कक्षा में परिचर्चा आयोजित कीजिए।
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शिक्षा जैसे महत्त्वपूण मसले पर बड़े भाई साहब के विचारों को स्पष्ट कीजिए।
खेल में लौटे १ई साब लेखक का साइत किस तरह करते थे?
अंग्रेजी विषय के बारे में भाई व लेखक को क्या बताते थे? ऐसा कहने के पीछे भाई साहब का उद्देश्य क्या था
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भाई साहब के फेल होने और खुद के अव्वल आने पर लेखक के मन में क्या-क्या विचार आए?
भाई साहब भले ही फेल होकर एक कक्षा में दो-तीन साल लगाते थे पर उनकी सहज बुधि बड़ी तेज़ थी। स्पष्ट कीजिए।
बड़े भाई साहब ने तत्कालीन शिक्षा प्रणाली की जिन कमियों की ओर संकेत करते हुए अपने फेल होने के लिए उसे उत्तरदायी ठहराने की कोशिश की है, उससे आप कितना सहमत हैं? अपने विचार लिखिए।
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग 60 शब्दों में लिखिए -
छोटे भाई के कक्षा में अव्वल आने पर भी बड़े भाई साहब द्वारा उसके तिरस्कार के क्या कारण थे? 'बड़े भाई साहब' पाठ के आधार पर लिखिए।
