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फ़ीनॉल का द्विध्रुव अघूर्ण मेथेनॉल से कम क्यों होता है? - Chemistry (रसायन विज्ञान)

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Question

फ़ीनॉल का द्विध्रुव अघूर्ण मेथेनॉल से कम क्यों होता है?

Short/Brief Note
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Solution

फ़ीनॉल में बेन्जीन वलय के इलेक्ट्रॉन अपनयक प्रभाव के कारण C−O आबंध कम ध्रुवीय होता है जबकि मेथेनॉल में −CH3 समूह के इलेक्ट्रॉन विमोचक प्रभाव के कारण C−O आबंध अधिक ध्रुवीय होता है। इसलिए, फ़ीनॉल (1.54 D) का द्विध्रुव अघूर्ण मेथेनॉल (1.71 D) से कम होता है।

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ऐल्कोहॉली और फ़िनॉलो का विरचन
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Chapter 11: ऐल्कोहॉल, फ़ीनॉल एवं ईथर - अभ्यास [Page 170]

APPEARS IN

NCERT Exemplar Chemistry [Hindi] Class 12
Chapter 11 ऐल्कोहॉल, फ़ीनॉल एवं ईथर
अभ्यास | Q III. 49. | Page 170

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m-क्रीसॉल का IUPAC ______ नाम है।


फ़ीनॉल ______ से कम अम्लीय है।


o-नाइट्रोफ़ीनॉल और p-नाइट्रोफ़ीनॉल में से कौन-सा अधिक वाष्पशील है? स्पष्ट कीजिए।


o-नाइट्रोफ़ीनॉल और o-क्रीसॉल में से कौन-सा अधिक अम्लीय है?


फ़ीनॉल को ब्रोमीन जल से अभिकृत करने पर श्वेत अवक्षेप प्राप्त होता है। बनने वाले यौगिक का नाम और संरचना लिखिए।


निम्नलिखित यौगिकों को अम्लता के बढ़ते हुए क्रम में व्यवस्थित कीजिए और उपयुक्त स्पष्टीकरण लिखिए।

फ़ीनॉल, o-नाइट्रोफ़ीनॉल, o-क्रीसॉल


बेन्जीन डाइऐज़ोनियम क्लोराइड को जल के साथ गरम करने से क्या होता है?


स्पष्ट कीजिए कि फ़ीनॉलों में नाभिकरागी प्रतिस्थापन अभिक्रियाएँ सामान्यतः बहुत अधिक क्यों नहीं होतीं?


जल, एथेनॉल और फ़ीनॉल को अम्ल प्रबलता के बढ़ते क्रम में व्यवस्थित कीजिए और अपने उत्तर का कारण लिखिए।


कॉलम I और कॉलम II के मदों को सुमेलित कीजिए।

कॉलम I कॉलम II
(i) कार इंजन में प्रयुक्त होने वाला प्रतिहिम (a) उदासीन फेरिक क्लोराइड
(ii) सुगंध में प्रयुक्त होने वाला विलायक (b) ग्लिसरॉल
(iii) पिक्रिक अम्ल का प्रारंभन पदार्थ (c) मेथेनॉल
(iv) काष्ठ स्पिरिट (d) फ़ीनॉल
(v) फ़ीनॉलिक समूह के संसूचन के लिए प्रयुक्त अभिकर्मक (e) एथेलीनग्लाइकॉल
(vi) साबुन उद्योग का अतिरिक्त उत्पाद जो कांतिवर्धकों में प्रयुक्त होता है (f) एथेनॉल

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