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प्रश्न
फ़ीनॉल का द्विध्रुव अघूर्ण मेथेनॉल से कम क्यों होता है?
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उत्तर
फ़ीनॉल में बेन्जीन वलय के इलेक्ट्रॉन अपनयक प्रभाव के कारण C−O आबंध कम ध्रुवीय होता है जबकि मेथेनॉल में −CH3 समूह के इलेक्ट्रॉन विमोचक प्रभाव के कारण C−O आबंध अधिक ध्रुवीय होता है। इसलिए, फ़ीनॉल (1.54 D) का द्विध्रुव अघूर्ण मेथेनॉल (1.71 D) से कम होता है।
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कॉलम I और कॉलम II के मदों को सुमेलित कीजिए।
| कॉलम I | कॉलम II |
| (i) मेथेनॉल | (a) फ़ीनॉल का o-हाइड्रॉक्सीसैलिसिलिक अम्ल में परिवर्तन |
| (ii) कोल्बे अभिक्रिया | (b) एथिल ऐल्कोहॉल |
| (iii) विलियम्सन संश्लेषण | (c) फ़ीनॉल का सैलिसिलऐल्डिहाइड मेंपरिवर्तन |
| (iv) 2° ऐल्कोहॉल का कीटोन में परिवर्तन | (d) काष्ठ स्पिरिट |
| (v) राइमर-टीमन अभिक्रिया | (e) 573 K पर तप्त कॉपर |
| (vi) किण्वन | (f) ऐल्किल हैलाइड की सोडियम ऐल्कॉक्साइड के साथ अभिक्रिया |
