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Question
दोनों सवैयों के प्रसंगों में अंतर स्पष्ट करो।
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Solution
पहले सवैये में वन जाते समय सीता जी की व्याकुलता और थकान का वर्णन किया गया है। वे अपने गंतव्य के बारे में जानने के लिए उत्सुक हैं। सीता जी की इस दयनीय अवस्था को देखकर रामचंद्र जी भी दुखी हो जाते हैं। नगर से बाहर निकलने के बाद, कुछ दूर चलने पर ही सीता जी थक जाती हैं। उनके माथे पर पसीना आ जाता है और होंठ सूखने लगते हैं। व्याकुल होकर वे श्रीराम से पूछती हैं कि अभी और कितनी दूर चलना है और पर्णकुटी कहाँ बनानी है। उनकी इस दशा को देखकर श्रीराम की आँखों में आँसू आ जाते हैं। दूसरे सवैये में श्रीराम और सीता की दशा का मार्मिक चित्रण है। इसमें श्रीराम और सीता जी के प्रेम को दर्शाया गया है, जहाँ श्रीराम सीता के थक जाने पर उनके पैरों के काँटे निकालते हैं और सीता श्रीराम का अपने प्रति प्रेम देखकर आनंदित हो जाती हैं।
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लखि – देखकर
धरि – रखकर
पोंछि – पोंछकर
जानि – जानकर
ऊपर लिखे शब्दों और उनके अर्थों को ध्यान से देखो। हिन्दी में जिस उद्देश्य | के लिए हम क्रिया में ‘कर’ जोड़ते हैं, उसी के लिए अवधी में क्रिया में ि (इ) को जोड़ा जाता है, जैसे-अवधी में बैठ + ि = बैठि और हिंदी में बैठ + कर = बैठकर। तुम्हारी भाषा या बोली में क्या होता है? अपनी भाषा के लिए छह शब्द लिखो। उन्हें ध्यान से देखो और कक्षा में सुनाओ।
