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दोनों सवैयों के प्रसंगों में अंतर स्पष्ट करो। - Hindi (हिंदी)

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Question

दोनों सवैयों के प्रसंगों में अंतर स्पष्ट करो।

Short Answer
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Solution

पहले सवैये में वन जाते समय सीता जी की व्याकुलता और थकान का वर्णन किया गया है। वे अपने गंतव्य के बारे में जानने के लिए उत्सुक हैं। सीता जी की इस दयनीय अवस्था को देखकर रामचंद्र जी भी दुखी हो जाते हैं। नगर से बाहर निकलने के बाद, कुछ दूर चलने पर ही सीता जी थक जाती हैं। उनके माथे पर पसीना आ जाता है और होंठ सूखने लगते हैं। व्याकुल होकर वे श्रीराम से पूछती हैं कि अभी और कितनी दूर चलना है और पर्णकुटी कहाँ बनानी है। उनकी इस दशा को देखकर श्रीराम की आँखों में आँसू आ जाते हैं। दूसरे सवैये में श्रीराम और सीता की दशा का मार्मिक चित्रण है। इसमें श्रीराम और सीता जी के प्रेम को दर्शाया गया है, जहाँ श्रीराम सीता के थक जाने पर उनके पैरों के काँटे निकालते हैं और सीता श्रीराम का अपने प्रति प्रेम देखकर आनंदित हो जाती हैं।

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पद्य (Poetry) (Class 6)
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Chapter 16: वन के मार्ग में - सवैया से [Page 116]

APPEARS IN

NCERT Hindi - Vasant Part 1 Class 6
Chapter 16 वन के मार्ग में
सवैया से | Q 4 | Page 116

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कवि ने नीली चिड़िया का नाम नहीं बताया है। वह कौन सी चिड़िया रही होगी? इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए पक्षी-विज्ञानी सालिम अली की पुस्तक ‘भारतीय पक्षी’ देखो। इनमें ऐसे पक्षी भी शामिल हैं जो जाड़े में एशिया के उत्तरी भाग और अन्य ठंडे देशों से भारत आते हैं। उनकी पुस्तक को देखकर तुम अनुमान लगा सकते हो कि इस कविता में वर्णित नीली चिड़िया शायद इनमें से कोई एक रही होगी-
नीलकंठ
छोटा किलकिला
कबूतर
बड़ा पतरिंगा


वह चिड़िया________ जुंडी के दाने रुचि से ______खा लेती है।
वह चिड़िया_________.रस उँडेल कर गा लेती है।

कविता की इन पंक्तियों में मोटे छापे वाले शब्दों को ध्यान से पढ़ो। पहले वाक्य में 'रुचि से' खाने के ढंग की और दूसरे वाक्य में 'रस ऊँडेल कर' गाने के ढंग की विशेषता बता रहे हैं। अतः ये दोनों क्रियाविशेषण हैं। नीचे दिए वाक्यों में कार्य के ढंग या रीति से संबंधित क्रिया-विशेषण छाँटो −
(क) सोनाली जल्दी-जल्दी मुँह में लड्डू ठूसने लगी।
(ख) गेंद लुढ़कती हुई झाड़ियों में चली गई।
(ग) भूकंप के बाद मुज़फ़्फ़राबाद की ज़िंदगी धीरे-धीरे सामान्य होने लगी।
(घ) कोई सफ़ेद-सी चीज़ धप्प से आँगन में गिरी।
(ङ) इबोबी फुर्ती से चोर पर झपटा।
(च) तेजिंदर सहमकर कोने में बैठ गया।
(छ) यह पत्र मिलते ही फ़ौरन घर चली आओ।
(ज) आज अचानक ठंड बढ़ गई है।


बहुविकल्पी प्रश्नोत्तर
चिड़िया के पंख के रंग कैसे हैं?


बहुविकल्पी प्रश्नोत्तर
चिड़िया को किन चीज़ों से प्यार है?


अनाज के दाने किससे भरे हुए हैं?


चिड़िया अपना जीवन कैसे व्यतीत करती है?


‘आप पहने हुए हैं कुल आकाश’ के माध्यम से लड़की कहना चाहती है कि-
(क) चाँद तारों से जड़ी हुई चादर ओढ़कर बैठा है।
(ख) चाँद की पोशाक चारों दिशाओं में फैली हुई है।
तुम किसे सही मानते हो ?


'बिलकुल गोल' - कविता में इसके दो अर्थ हैं-

(क) गोल आकार का

(ख) गायब होना!

ऐसे तीन शब्द सोचकर उनसे ऐसे वाक्य बनाओ कि शब्दों के दो-दो अर्थ निकलते हों।


यह ‘मरज़’ आपको अच्छा ही नहीं होने में आता है, का आशय स्पष्ट कीजिए।


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इस कविता को पढ़ने के बाद एक बच्ची और उसकी माँ का चित्र तुम्हारे मन में उभरता है। वह बच्ची और क्या-क्या कहती होगी? क्या-क्या करती होगी? कल्पना करके एक कहानी बनाओ।


माँ अपना एक दिन कैसे गुज़ारती है? कुछ मौकों पर उसकी दिनचर्या बदल जाया करती है, जैसे-मेहमानों के आ जाने पर, घर में किसी के बीमार पड़ जाने पर या त्योहार के दिन। इन अवसरों पर माँ की दिनचर्या पर क्या फ़र्क पड़ता है? सोचो और लिखो।


नीचे दिए गए शब्दों में अंतर बताओ, उनमें क्या फ़र्क है?

  • स्नेह – प्रेम
  • ग्रह – गृह
  • शांति – सन्नाटा
  • निधन – निर्धन
  • धूल – राखे
  • समान – सामान

लखि – देखकर
धरि – रखकर
पोंछि – पोंछकर
जानि – जानकर
ऊपर लिखे शब्दों और उनके अर्थों को ध्यान से देखो। हिन्दी में जिस उद्देश्य | के लिए हम क्रिया में ‘कर’ जोड़ते हैं, उसी के लिए अवधी में क्रिया में ि (इ) को जोड़ा जाता है, जैसे-अवधी में बैठ + ि = बैठि और हिंदी में बैठ + कर = बैठकर। तुम्हारी भाषा या बोली में क्या होता है? अपनी भाषा के लिए छह शब्द लिखो। उन्हें ध्यान से देखो और कक्षा में सुनाओ।


मिट्टी का गहरा अंधकार, डूबा है उसमें एक बीज ।” उसमें एक बीज डूबा है।
जब हम किसी बात को कविता में कहते हैं तो वाक्य के शब्दों के क्रम में बदलाव | आता है, जैसे-“छाँह घरीक है ठाढ़े” को गद्य में ऐसे लिखा जा सकता है। “छाया में एक घड़ी खड़ा होकर” । उदाहरण के आधार पर नीचे दी गई कविता की पंक्तियों को गद्य के शब्दक्रम में लिखो।

पुर ते निकसी रघुबीर-बधू,
पुट सूखि गए मधुराधर वै।
बैठि बिलंब लौं कंटक काढ़े।
पर्नकुटी करिहौं कित है?


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