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भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए - ‘जिज्ञासु, प्रबुद्ध, सदा श्रद्धामय, इसको भक्ति को दे दो।’

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Question

भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -

‘जिज्ञासु, प्रबुद्ध, सदा श्रद्धामय, इसको भक्ति को दे दो।’

Short Answer
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Solution

कविता में दीप को कवि ने व्यक्ति के रूप में चित्रित किया है।व्यक्ति हमेशा जिज्ञासु प्रवृत्ति का रहा है। इसी कारण वह ज्ञानवान और श्रद्धा से भरा हुआ है। मनुष्य तथा दीप दोनों में ये गुण विद्यमान होते हैं।

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यह दीप अकेला
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Chapter 1.03: सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' - यह दिप अकेला, मैंने देखा, एक बूँद - प्रश्न-अभ्यास [Page 18]

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NCERT Hindi Antara Bhag 2 Class 12
Chapter 1.03 सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' - यह दिप अकेला, मैंने देखा, एक बूँद
प्रश्न-अभ्यास | Q 6. (ग) | Page 18

RELATED QUESTIONS

'दीप अकेला' के प्रतीकार्थ को स्पष्ट करते हुए बताइए कि उसे कवि ने स्नेह भरा, गर्व भरा एवं मदमाता क्यों कहा है?


यह दीप अकेला है 'पर इसको भी पंक्ति को दे दो' के आधार पर व्यष्टि का समिष्ट में विलय क्यों और कैसे संभव है?


'गीत' और 'मोती' की सार्थकता किससे जुड़ी है?


'यह अद्वितीय-यह मेरा-यह मैं स्वयं विसर्जित'- पंक्ति के आधार पर व्यष्टि के समष्टि में विसर्जन की उपयोगिता बताइए।


'यह मधु है ....... तकता निर्भय'- पंक्तियों के आधार पर बताइए कि 'मधु', 'गोरस' और 'अंकुर' को क्या विशेषता हैं?


भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -
'यह प्रकृत, स्वयंभू  ......... शक्ति को दे दो।'


भाव-सौंदर्य स्पष्ट कीजिए -

'यह सदा-द्रवित, चिर-जागरूक .......... चिर-अखंड अपनापा।'


'यह दीप अकेला' एक प्रयोगवादी कविता है। इस कविता के आधार पर 'लघु मानव' के अस्तित्व और महत्व पर प्रकाश डालिए।


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