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Question
बड़े होकर क्या बनना चाहते हो?
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Solution
मैं बड़ा होकर एक डॉक्टर बनना चाहता हूँ। डॉक्टर बनकर मैं देश के गरीब व असहाय लोगों का इलाज करूँगा। एक डॉक्टर होते हुए मैं असाध्य रोगों के इलाज के लिए भी खोज करूँगा। मैं सदैव समाज की भलाई के लिए कार्य करना चाहता हूँ।
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कोई साप्ताहिक पत्रिका अनियमित रूप में प्राप्त होने के विरोध में शिकायत करते हुए संपादक को निम्न प्रारूप में पत्र लिखो :
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पत्र का प्रारूप दिनांक : ______ विषय : ______ __________________________________________________ भवदीय/भवदीया, ____________ नाम : ____________ ई-मेल आईडी : ____________ |
मैंने समझा बेटी युग कविता से
यदि तुम सैनिक होते तो .....
अपने चित्र के बारे में बोलो।

चित्र पहचानकर उनके नाम लिखो:

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चित्र पहचानकर उनके नाम लिखो:

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।। हे विश्वचि माझे घर ।।
तुम अपनी छोटी बहन/छोटे भाई के लिए क्या करते हो?
निम्नलिखित चित्रों के नाम बताओ और जानकारी लिखो।

निम्नलिखित परिच्छेद पढ़कर इसपर आधारित ऐसे चार प्रश्न तैयार कीजिए. जिनके उत्तर एक-एक वाक्य में हों:
| “कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए ‘असंभव’, ‘गंदा’ या ‘नीचा’ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।” ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।” मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और ‘निर्मल हृदय’ जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं। |
