Advertisements
Advertisements
Question
आपकी दृष्टि में कन्या के साथ दान की बात करना कहाँ तक उचित है?
Advertisements
Solution
कन्या माता पिता के लिए कोई वस्तु नहीं है बल्कि उसका सम्बन्ध उनके भावनाओं से है। दान वस्तुओं का होता है। बेटियों के अंदर भी भावनाएँ होती हैं। उनका अपना एक अलग अस्तित्व होता है। विवाह के पश्चात् उसका सम्बन्ध नए लोगों से जुड़ता है परन्तु पुराने रिश्तों को छोड़ देना दु:खदायक होता है। अत: कन्या का दान कर उसे त्याग देना उचित नहीं है।
RELATED QUESTIONS
'आग रोटियाँ सेंकने के लिए है।
जलने के लिए नहीं'
(क) इन पंक्तियों में समाज में स्त्री की किस स्थिति की ओर संकेत किया गया है?
(ख) माँ ने बेटी को सचेत करना क्यों ज़रूरी समझा?
माँ को अपनी बेटी 'अंतिम पूँजी' क्यों लग रही थी?
वैवाहिक संस्कार में कन्यादान खुशी का अवसर माना जाता है, पर यहाँ माँ दुखी क्यों थी?
लड़की की माँ की चिंता के क्या कारण थे?
‘कन्यादान’ कविता में ऐसा क्यों कहा गया है कि लड़की को दुख बाँचना नहीं आता?
‘आग रोटियाँ सेंकने के लिए है जलने के लिए नहीं’ कहकर कवयित्री ने समाज पर क्या व्यंग्य किया है?
‘कन्यादान’ कविता में नारी सुलभ किन कमजोरियों की ओर संकेत किया गया है?
‘कन्यादान’ कविता में माँ द्वारा जो सीख दी गई हैं, वे वर्तमान परिस्थितियों में कितनी प्रासंगिक हैं, स्पष्ट कीजिए।
‘कन्यादान’ कविता का प्रतिपाद्य लिखिए।
इस सत्र में पढ़ी गई किस कविता में कोरी भावुकता न होकर जीवन में संचित किए अनुभवों की अनिवार्य सीख है? कविता के नाम के साथ कथन की पुष्टि के लिए उपयुक्त तर्क भी प्रस्तुत कीजिए।
इस सत्र में पढ़ी गई किस कविता की अंतिम पंक्तियाँ आपको प्रभावित करती हैं और क्यों? तर्क सहित स्पष्ट कीजिए।
‘कन्यादान’ कविता में शाब्दिक भ्रम किसे और क्यों कहा गया है?
‘कन्यादान’ कविता में माँ की परंपरागत छवि से हटकर नए दृष्टिकोण से विचार किया गया है। उसमें नया क्या है? आप उन विचारों से कहाँ तक सहमत हैं और क्यों?
