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Question
वर्तमान में ‘कन्यादान’ जैसी परंपरा के औचित्य-अनौचित्य पर अपने तर्कसंगत विचार लिखिए।
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Solution
शास्त्रों में बताया गया है कि जब कन्या के पिता शास्त्राविधि विधान के अनुसार कन्यादान की रस्म निभाते हैं तो कन्या के माता-पिता तथा परिवार को भी सौभाग्य की प्राप्ति होती है। कन्यादान से मरणोपरांत मोक्ष की प्राप्ति भी होती है। दक्ष प्रजापति ने अपनी कन्याओं के विवाह करने के बाद कन्यादान किया था। हमारी दृष्टि से कन्या के साथ दान की बात करना सर्वथा अनुचित है। कन्या कोई वस्तु नहीं जिसका दान किया जा सके। उसका अपना स्वतंत्र अस्तित्व है। यह तो पुरुष प्रधान समाज की नासमझी का परिचायक है कि जिन बेटियों को हम देवी मानते हैं; उन्हीं को दान करने की बात कहते हैं।
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