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‘कन्यादान’ कविता में माँ की परंपरागत छवि से हटकर नए दृष्टिकोण से विचार किया गया है। उसमें नया क्या है? आप उन विचारों से कहाँ तक सहमत हैं और क्यों? - Hindi Course - A

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Question

‘कन्यादान’ कविता में माँ की परंपरागत छवि से हटकर नए दृष्टिकोण से विचार किया गया है। उसमें नया क्या है? आप उन विचारों से कहाँ तक सहमत हैं और क्यों?

Answer in Brief
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Solution

‘कन्यादान’ कविता की माँ परंपरागत माँ से बिल्कुल भिन्न है। परंपरागत माँ अपनी बेटी को कुछ सहकर दूसरों की सेवा करने की सीख देती है लेकिन कविता में माँ अपनी बेटी को सीख देती है कि लड़की के गुणों को बनाए रखना, कमज़ोर मत बनना। वह दहेज के लिए जलाए जाने के खतरे के बारे में भी लड़की को आगाह करती है। कविता में वर्णित माँ सामाजिक विकृतियों के प्रति जागरुक है। वह नारी शोषण के प्रति बेटी को सचेत करती है। वह उसे सफल बनने के लिए प्रेरित करती हुई कहती है कि समाज में आए परिवर्तन को खुली आँखों से देखे और अपने भीतर हिम्मत और साहस को बटोरे। उसके हृदय में साहस और अधिकारों के प्रति जागरुकता ही उसके जीवन को नई दिशा देंगे। इसी से उसके जीवन की रक्षा होगी।

हम इन विचारों से पूर्ण सहमत हैं, क्योंकि वर्तमान में स्त्रियों की कोमलता को कमज़ोरी न समझकर उसके सशक्तीकरण के विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं।

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कन्यादान
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2021-2022 (March) Outside Delhi Set 1

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