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NCERT solutions for हिन्दी गंगा [अंग्रेजी] कक्षा १२ chapter 8 - पद [Latest edition]

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Chapters

गद्य खंड

   Chapter 1: दो बैलों की कथा

   Chapter 2: क्या लिखूँ?

   Chapter 3: संवादहीन

   Chapter 4: ऐसी भी बातें होती हैं (लता मंगेशकर से साक्षात्कार)

   Chapter 5: आखिरी चट्टान तक

   Chapter 6: रीढ़ की हड्डी

    7: मैं और मेरा देश

काव्य खंड

▶ 8: पद

   Chapter 9: राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद

   Chapter 10: भारति, जय, विजयकरे!

   Chapter 11: झाँसी की रानी

   Chapter 12: घर की याद

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Solutions for Chapter 8: पद

Below listed, you can find solutions for Chapter 8 of CBSE NCERT for हिन्दी गंगा [अंग्रेजी] कक्षा १२.


अभ्यास
अभ्यास [Pages 147 - 150]

NCERT solutions for हिन्दी गंगा [अंग्रेजी] कक्षा १२ 8 पद अभ्यास [Pages 147 - 150]

रचना से संवाद - मेरे उत्तर मेरे तर्क

1.Page 147

निम्नलिखित प्रश्न का सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगता है?

“अब कैसे छूटै राम रट लागी” पंक्ति का भाव है?
  • नाम उच्चारण की कठिनाई

  • नाम रटकर याद करना

  • आराध्य का नाम जपना

  • मित्रों का नाम रटना

2.Page 147

निम्नलिखित प्रश्न का सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगता है?

“प्रभु जी तुम चंदन हम पानी” पंक्ति में आराध्य और भक्त का संबंध किस रूप में व्यक्त हुआ है?

  • एकाकार और समरूप

  • तरल और तीव्र सुगंध

  • आश्रय और आश्रित

  • द्रव और ठोस

3.Page 147

निम्नलिखित प्रश्न का सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगता है?

“तुम दीपक, हम बाती” से रैदास का क्या भाव है?

  • दीपक और बाती का कोई मेल नहीं होता है।

  • दीपक बिना बाती भी जल सकता है।

  • भक्त आराध्य से अधिक महत्वपूर्ण है।

  • भक्त का आराध्य से मेल जीवन को आलोकित करता है।

4.Page 147

निम्नलिखित प्रश्न का सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगता है?

“जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ” पंक्ति में रैदास का क्या आशय है?

  • परोपकारी भक्ति भाव

  • आराध्य से अटूट संबंध

  • सांसारिक मोह

  • कर्मकांड पर बल

5.Page 147

निम्नलिखित प्रश्न का सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगता है?

“तीरथ बरत न करूँ अंदेसा” पंक्ति से आप क्या समझते हैं?

  • तीर्थ और व्रत आवश्यक नहीं हैं।

  • तीर्थ और व्रत सब आवश्यक हैं।

  • तीर्थ जाने से मुक्ति निश्चित है।

  • आराध्य के चरणों में सच्चा आश्रय है।

6.Page 148

निम्नलिखित प्रश्न का सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगता है?

सर्वव्यापक ईश्वर की अवधारणा किस पंक्ति में व्यक्त होती है?

  • “जहँ जहँ जाओ तुम्हरी पूजा”

  • “जाकी जोति बरै दिन राती”

  • “तुम दीपक, हम बाती”

  • “तीरथ बरत न करूँ अंदेसा”

अर्थ और भाव

(क)Page 148

नीचे दी गई पंक्ति का अर्थ समझाते हुए भाव स्पष्ट कीजिए-

“प्रभु जी तुम घन बन, हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा।”

(ख)Page 148

नीचे दी गई पंक्ति का अर्थ समझाते हुए भाव स्पष्ट कीजिए-

“तीरथ बरत न करूँ अंदेसा, तुम्हरे चरन कमल एक भरोसा।”

मेरी समझ मेरे विचार

1.Page 148

नीचे दिए गए प्रश्न पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उसका उत्तर लिखिए-

“जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ” पंक्ति में रैदास की अपने आराध्य में अटूट निष्ठा का भाव है। इससे आप क्या समझते हैं? विस्तार से लिखिए।

2.Page 148

नीचे दिए गए प्रश्न पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उसका उत्तर लिखिए-

रैदास ने तीर्थ और व्रत के स्थान पर किस साधन को भक्ति का प्रमुख आधार माना है? आपके विचार से भक्ति के क्या आधार हो सकते हैं?

3.Page 148

दोनों पदों में भक्त और आराध्य के संबंध को किन-किन प्रतीकों/उपमाओं से व्यक्त किया गया है? लिखिए।

विधा से संवाद - कविता का सौंदर्य

1.Page 148
  • “प्रभु जी तुम घन बन, हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा।”

उपर्युक्त पंक्ति के रेखांकित अंश पर ध्यान दीजिए। इसमें अनुप्रास अलंकार का प्रयोग किया गया है। जिस रचना में व्यंजन। वर्णों की आवृत्ति एक से अधिक बार होती है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।

  • “प्रभु जी तुम मोती, हम धागा, जैसे सोने मिलत सुहागा।”

उपर्युक्त रेखांकित अंश में उपमा अलंकार है। किसी प्रसिद्ध वस्तु की समानता के आधार पर जब किसी वस्तु या व्यक्ति के रूप, गुण, धर्म का वर्णन किया जाता है तो वहाँ उपमा अलंकार होता है।

  • “तीरथ बरत न करूँ अंदेसा तुम्हरे चरन कमल एक भरोसा।”

उपर्युक्त रेखांकित अंश में रूपक अलंकार है। रूपक अलंकार वहाँ होता है जहाँ रूप और गुण की अत्यधिक समानता के कारण उपमेय में उपमान का आरोप कर अभेद स्थापित किया जाए।

अब आप अपनी पाठ्यपुस्तक में सम्मिलित कविताओं में अनुप्रास, उपमा और रूपक अलंकार वाली अन्य पंक्तियों को ढूँढ़कर लिखिए।

कविता की कुछ अन्य विशेषताएँ

1.Page 149

नीचे दी गई सूची को ध्यान से देखिए। इस सूची में रैदास के दोनों पदों से कुछ विशेषताएँ चुनकर दी गई हैं। पदों में से चुनकर इन विशेषताओं को दर्शाती पंक्तियाँ लिखिए। उदाहरण के लिए पहली विशेषता के सामने पंक्ति दी गई है।

विशेषताएँ उदाहरण

अनन्‍य भक्‍त‍ि भाव

“जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ, तुम सौ तोरि कवन सौं जोरौ।”
सरल और लोकधर्मी भाषा  
उपमा और तलुना  
लयात्मकता और गेयता/ध्वन्यात्मकता  
दृढ़ निष्ठा और आस्था  

विषयों से संवाद

1.Page 149

तीर्थ और व्रत के स्थान पर रैदास ने आराध्य की भक्ति को प्रधान माना है। भक्तिकाल के कवि रैदास की तरह कबीर भी निराकार आराध्य की भक्ति पर बल देते हैं। तत्कालीन सामाजिक, सांस्कृतिक परिस्थितियों के आधार पर बताइए कि इसके क्या कारण हो सकते हैं?

(संकेत – आप अपने सामाजिक विज्ञान के शिक्षक की सहायता भी ले सकते हैं।)

2.Page 150

“सोने मिलत सुहागा”

‘सुहागा’ एक प्राकृतिक खनिज है जिसके प्रयोग से सोने की अशुद्धियाँ दूर हो जाती हैं और उसकी चमक बढ़ जाती है। ‘सुहागा’ का रासायनिक नाम और उसकी विशेषताएँ अपने विज्ञान के शिक्षक से चर्चा करके लिखिए।

भाषा से संवाद - व्याकरण की बात - शब्दों की बात

1.Page 150

पठित पदों में से संज्ञा और सर्वनाम के तीन-तीन उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए।

2.Page 150

रैदास के इन दोनों पदों में बहुत से ऐसे शब्द प्रयुक्त हुए हैं जिनके स्थान पर अन्य शब्दों का प्रयोग होता है। नीचे सूची में दिए गए शब्दों को देखिए। आप या आपके आस-पास के लोग इन शब्दों के लिए किन अन्य शब्दों का प्रयोग करते हैं? लिखिए।

मोरा, चकोरा, बाती, राती, सोने, तीरथ, बरत

सृजन

1.Page 150

कक्षा में समूह बनाकर इन दोनों पदों को गाकर/पाठ करके प्रस्तुत कीजिए।

2.Page 150

कल्पना कीजिए कि पद में आई उपमाओं के आधार पर भक्त और आराध्य आपस में बात कर रहे हैं। इस दृश्य को आधार बनाकर संवाद-लेखन कीजिए।

3.Page 150

“जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ” पंक्ति को आधार बनाकर अटूट मित्रता पर एक लघुकथा तैयार कीजिए।

झरोखे से

1.Page 150

आपने रैदास के पद पढ़े। अब आप रैदास की तरह ही महाराष्ट्र के संत कवि नामदेव के आगे दिए गए दो पद पढ़िए। निर्गुण संत काव्य परंपरा के संत कवि नामदेव का जन्म 13वीं – 14वीं शताब्दी में महाराष्ट्र में हुआ। अन्य संत कवियों की भाँति नामदेव ने भी बाह्य आडंबरों, सामाजिक रूढ़ियों का विरोध कर सामाजिक समरसता, प्रेम एवं निराकार भक्ति से संबंधित पदों की रचना की है।

(1)

माइ न होती बापु न होता करम न होती काया।
हम नहिं होते, तुम नहिं होते, कवन कहां ते आया।।
राम कोइ न किसी केरा। जैसे तरवर पंखि बसेरा।।
चंद न होता, सूर न होता, पानी होता मिलाया।
सास्त्र न होता बेद न होता, करमु कहां ते आया।।
खेचरि भूचरि तुलसी माला गुरपरसादी पाया।
नामा प्रणवै परम तत्त कूं सतगुर मोहि लखाया।।

(2)

मोहि लागति तालाबेली।
बछरा बिनु गाइ अकेली।।
पानी बिनु ज्यूं मीन तलफैं।
ऐसे रामनाम बिनु नामा कलपै।।
जैसे गाइ का बाछा छूटला।।
थन चोखता माखन घूटला।।
नामदेउ नारायन पाया।
गुर भेटत ही अलख लखाया।।
जैसे विषै हेत परनारी।
ऐसे नामे प्रीति मुरारी।।
जैसे ताप ते निरमल घामा।
तैसे रामनाम बिनु बापुरो नामा।।

अब अपनी कक्षा में चर्चा कीजिए और बताइए कि रैदास तथा नामदेव के पदों में क्या-क्या अंतर है और क्या-क्या समानताएँ हैं?

Solutions for 8: पद

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NCERT solutions for हिन्दी गंगा [अंग्रेजी] कक्षा १२ chapter 8 - पद

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