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प्रश्न
कल्पना कीजिए कि पद में आई उपमाओं के आधार पर भक्त और आराध्य आपस में बात कर रहे हैं। इस दृश्य को आधार बनाकर संवाद-लेखन कीजिए।
लेखन कौशल
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उत्तर
| भक्त: | प्रभु जी, आप चंदन के समान हैं और मैं जल के समान। मेरा अस्तित्व आपसे जुड़कर ही सार्थक होता है। |
| आराध्य: | भक्त, जिस प्रकार चंदन की सुगंध जल में समा जाती है, उसी प्रकार मैं भी तुम्हारे हृदय में सदैव निवास करता हूँ। |
| भक्त: | प्रभु जी, आप मेघ हैं और मैं मोर। आपके बिना मेरा मन अशांत और उदास रहता है। |
| आराध्य: | जब भी तुम मुझे प्रेमपूर्वक स्मरण करते हो, मैं तुम्हारे समीप उपस्थित रहता हूँ, जैसे बादलों को देखकर मोर आनंदित हो जाता है। |
| भक्त: | प्रभु जी, आप दीपक हैं और मैं बाती। आपके बिना मेरा जीवन अंधकारमय है। |
| आराध्य: | तुम्हारी श्रद्धा और प्रेम से ही मेरी ज्योति प्रकाशित होती है; हम दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं। |
| भक्त: | प्रभु जी, आप मोती हैं और मैं धागा। आपसे जुड़कर ही मेरा जीवन मूल्यवान और सुंदर बनता है। |
| आराध्य: | जैसे धागा मोतियों को एक सूत्र में पिरोकर रखता है, वैसे ही तुम्हारा प्रेम मुझे अपने निकट बनाए रखता है। |
| भक्त: | प्रभु जी, आप मेरे स्वामी हैं और मैं आपका सेवक। मेरा सर्वस्व आप ही हैं। |
| आराध्य: | तुम्हारी सच्ची भक्ति और समर्पण ही तुम्हें मेरे सबसे निकट ले आते हैं; मैं हर समय तुम्हारे साथ हूँ। |
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