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प्रश्न
“जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ” पंक्ति को आधार बनाकर अटूट मित्रता पर एक लघुकथा तैयार कीजिए।
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उत्तर
लघुकथा: सच्ची दोस्ती
मोहन और करण बचपन से अच्छे मित्र थे। वे एक ही विद्यालय में पढ़ते थे और अधिकांश समय साथ बिताते थे। एक दिन किसी छोटी-सी बात को लेकर दोनों के बीच गलतफहमी हो गई। क्रोधित होकर करण ने कहा कि वह अब मोहन से मित्रता समाप्त कर देगा।
मोहन ने शांत स्वर में उत्तर दिया, “यदि तुम दोस्ती तोड़ना चाहते हो, तो भी मैं इसे नहीं तोड़ूँगा।” उसके मन में संत रैदास की पंक्ति गूँज रही थी- “जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरौ।”
कुछ समय बाद करण को अपनी भूल का एहसास हुआ। उसे समझ में आया कि सच्चे मित्र छोटी-छोटी बातों पर अपने संबंध नहीं तोड़ते। वह मोहन के पास गया और अपनी गलती के लिए क्षमा माँगी। मोहन ने प्रसन्नतापूर्वक उसे गले लगा लिया।
उस दिन दोनों मित्रों ने यह सीखा कि सच्ची मित्रता वही होती है, जो विपरीत परिस्थितियों में भी बनी रहे और जिसमें विश्वास तथा अपनापन कभी कम न हो।
