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प्रश्न
नीचे दिए गए प्रश्न पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उसका उत्तर लिखिए-
रैदास ने तीर्थ और व्रत के स्थान पर किस साधन को भक्ति का प्रमुख आधार माना है? आपके विचार से भक्ति के क्या आधार हो सकते हैं?
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उत्तर
संत रैदास ने तीर्थ-यात्रा और व्रतों की तुलना में प्रभु-चरणों में की गई सच्ची भक्ति और पूर्ण समर्पण को भक्ति का मुख्य आधार माना है। उनके अनुसार बाहरी धार्मिक कर्मकांड उतने महत्वपूर्ण नहीं हैं, जितना मन से किया गया प्रेम और दृढ़ विश्वास। वे कहते हैं कि भगवान के चरणों में ही वास्तविक आश्रय प्राप्त होता है, इसलिए वही सबसे श्रेष्ठ साधन है।
मेरे अनुसार भक्ति के आधार श्रद्धा, विश्वास, प्रेम, समर्पण और सच्चे मन से किया गया स्मरण हो सकते हैं। जब कोई व्यक्ति बिना किसी स्वार्थ के ईश्वर का ध्यान करता है और अच्छे कर्म करता है, तब उसकी भक्ति सच्ची मानी जाती है। केवल पूजा-पाठ या व्रत करने से ही नहीं, बल्कि अच्छे विचार, दूसरों की सहायता और ईमानदारी के माध्यम से भी भक्ति व्यक्त होती है। इस प्रकार सच्ची भक्ति मन की पवित्रता और अच्छे आचरण पर आधारित होती है।
