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HSC Arts (Marathi Medium) १२ वीं कक्षा - Maharashtra State Board Important Questions

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भौगोलिक कारणे लिहा.

भूगोल विषयाचे स्वरूप द्वैतवादी आहे.

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Chapter: [8] भूगोल : स्वरूप व व्याप्ती
Concept: विद्याशाखा म्हणून भूगोलाचे स्वरूप

टिप लिहा.

भूगोलातील आधुनिक कल.

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Chapter: [8] भूगोल : स्वरूप व व्याप्ती
Concept: भूगोलातील आधुनिक कल

भूगोलाचे स्वरूप सविस्तर स्पष्ट करा.

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Chapter: [8] भूगोल : स्वरूप व व्याप्ती
Concept: विद्याशाखा म्हणून भूगोलाचे स्वरूप

सुबक आकृती काढा.

भूगोलाचा अन्य विषयांशी संबंध

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Chapter: [8] भूगोल : स्वरूप व व्याप्ती
Concept: भूगोलाची व्याप्ती

सुबक आकृती काढा.

भूगोलाच्या अभ्यासासाठी लागणारे कौशल्य

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Chapter: [8] भूगोल : स्वरूप व व्याप्ती
Concept: विद्याशाखा म्हणून भूगोलाचे स्वरूप

अलीकडे नकाशे G.I.S. च्या प्रणालीच्या आधारे तयार करतात.

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Chapter: [8] भूगोल : स्वरूप व व्याप्ती
Concept: भूगोलातील आधुनिक कल

ज्यामध्ये १७ खंडाचा समावेश आहे, असा भूगोल विषयाच्या माहितीचा ज्ञानकोश:

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Chapter: [8] भूगोल : स्वरूप व व्याप्ती
Concept: विद्याशाखा म्हणून भूगोलाचे स्वरूप

पुढील चुकीचा घटक ओळखा.

भूगोल अभ्यासकाची कौशल्ये -

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Chapter: [8] भूगोल : स्वरूप व व्याप्ती
Concept: विद्याशाखा म्हणून भूगोलाचे स्वरूप

पुढील चुकीचा घटक ओळखा.

प्राकृतिक भूगोलाच्या शाखा -

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Chapter: [8] भूगोल : स्वरूप व व्याप्ती
Concept: विद्याशाखा म्हणून भूगोलाचे स्वरूप

निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

              संयोग से तभी उन्हें कहीं से तीन सौ रुपये मिल गए। वही पूँजी मेरे पास जमा करके उन्होंने मुझे अपने खर्च का बजट बना देने का आदेश दिया। जिन्हें मेरा व्यक्तिगत हिसाब रखना पड़ता है, वे जानते हैं कि यह कार्य मेरे लिए कितना दुष्कर है। न वे मेरी चादर लंबी कर पाते हैं; न मुझे पैर सिकोड़ने पर बाध्य कर सकते हैं; और इस प्रकार एक विचित्र रस्साकशी में तीस दिन बीतते रहते हैं।

              पर यदि अनुत्तीर्ण परीक्षार्थियों की प्रतियोगिता हो तो सौ में दस अंक पाने वाला भी अपने-आपको शून्य पाने वाले से श्रेष्ठ मानेगा।

              अस्तु, नमक से लेकर नापित तक और चप्पल से लेकर मकान के किराये तक का जो अनुमानपत्र मैंने बनाया; वह जब निराला जी को पसंद आ गया, तब पहली बार मुझे अपने अर्थशास्त्र के ज्ञान पर गर्व हुआ। पर दूसरे ही दिन से मेरे गर्व की व्यर्थता सिद्ध होने लगी। वे सवेरे ही पहुँचे। पचास रुपये चाहिए... किसी विद्यार्थी का परीक्षा शुल्क जमा करना है, अन्यथा वह परीक्षा में नहीं बैठ सकेगा। संध्या होते-होते किसी साहित्यिक मित्र को साठ देने की आवश्यकता पड़ गई। दूसरे दिन लखनऊ के किसी ताँगेवाले की माँ को चालीस का मनीऑर्डर करना पड़ा। दोपहर को किसी दिवंगत मित्र की भतीजी के विवाह के लिए सौ देना अनिवार्य हो गया। सारांश यह कि तीसरे दिन उनका जमा किया हुआ रुपया समाप्त हो गया और तब उनके व्यवस्थापक के नाते यह दान खाता मेरे हिस्से आ पड़ा।

(१) संजाल पूर्ण कीजिए: (२)

(२) निम्नलिखित शब्दों के लिए गद्यांश में आए हुए विलोम शब्द लिखिए: (२)

  1. वियोग × ______
  2. उत्तीर्ण × ______
  3. नापसंद × ______
  4. अज्ञान × ______

(३) ‘जीवन में मित्रों का महत्त्व’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। (२)

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Chapter: [2] निराला भाई
Concept: निराला भाई

निम्नलिखित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

बड़े प्रयत्न से बनवाई रजाई, कोट जैसी नित्य व्यवहार की वस्तुएँ भी जब दूसरे ही दिन किसी अन्य का कष्ट दूर करने के लिए अंतर्धान हो गईं तब अर्थ के संबंध में क्या कहा जावे, जो साधन मात्र है। वह संध्या भी मेरी स्मृति में विशेष महत्त्व रखती है जब श्रद्धेय मैथिलीशरण जी निराला जी का आतिथ्य ग्रहण करने गए।

बगल में गुप्त जी के बिछौने का बंडल दबाए, दियासलाई के क्षण प्रकाश, क्षीण अंधकार में तंग सीढ़ियों का मार्ग दिखाते हुए निराला जी हमें उस कक्ष में ले गए जो उनकी कठोर साहित्य साधना का मूक साक्षी रहा है।

आले पर कपड़े की आधी जली बत्ती से भरा पर तेल से खाली मिट्टी का दीया मानो अपने नाम की सार्थकता के लिए जल उठने का प्रयास कर रहा था।

वह आलोकरहित, सुख-सुविधा शून्य घर, गृहस्वामी के विशाल आकार और उससे भी विशालतर आत्मीयता से भरा हुआ था। अपने संबंध में बेसुध निराला जी अपने अतिथि की सुविधा के लिए सतर्क प्रहरी हैं। अतिथि की सुविधा का विचार कर वे नया घड़ा खरीदकर गंगाजल ले आए और धोती-चादर जो कुछ घर में मिल सका; सब तख्त पर बिछाकर उन्हें प्रतिष्ठित किया।

तारों की छाया में उन दोनों मर्यादावादी और विद्रोही महाकवियों ने क्या कहा-सुना, यह मुझे ज्ञात नहीं पर सवेरे गुप्त जी को ट्रेन में बैठाकर वे मुझे उनके सुख शयन का समाचार देना न भूले।

ऐसे अवसरों की कमी नहीं जब वे अकस्मात पहुँचकर कहने लगे-मेरे इक्के पर कुछ लकड़ियाँ, थोड़ा घी आदि रखवा दो। अतिथि आए हैं, घर में सामान नहीं है।

  1. संजाल पूर्ण कीजिए:      [2]

  2. निम्नलिखित शब्दों के लिए गद्यांश में आए हुए समानार्थी शब्द ढूँढ़कर लिखिए:    [2]
    1. मेहमान - ______
    2. प्रयास - ______
    3. शाम - ______
    4. दीपक - ______
  3. 'आतिथ्य भाव' हमारे संस्कार हैं, इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए।    [2]
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Chapter: [2] निराला भाई
Concept: निराला भाई

कवि डॉक्टर जगदीश गुप्त की प्रमुख साहित्यिक कृतियों के नाम लिखिए।

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Chapter: [3] सच हम नहीं; सच तुम नहीं (पद्य)
Concept: सच हम नहीं; सच तुम नहीं

निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

अपने हृदय का सत्य, अपने-आप हमको खोजना।
अपने नयन का नीर, अपने-आप हमको पोंछना।
आकाश सुख देगा नहीं
धरती पसीजी है कहीं!
हर एक राही को भटककर ही दिशा मिलती रही।
सच हम नहीं, सच तुम नहीं।

बेकार है मुस्कान से ढकना हृदय की खिन्नता।
आदर्श हो सकती नहीं, तन और मन की भिन्नता।
जब तक बँधी है चेतना
जब तक प्रणय दुख से घना
तब तक न मानूँगा कभी, इस राह को ही मैं सही।
सच हम नहीं, सच तुम नहीं।

(१) उत्तर लिखिए: (२)

  1. हमें हृदय की इस बात को खोजना है - ______
  2. हर एक राही को भटककर मिलती है - ______
  3. इसे मुस्कान से ढकना बेकार है - ______
  4. यह आदर्श नहीं हो सकती है - ______

(२) निम्नलिखित शब्दों के प्रत्यय निकालकर पद्यांश में आए हुए मूल शब्द ढूँढ़कर लिखिए: (२)

  1. सत्यता - ______
  2. सुखी - ______
  3. राही - ______
  4. मुस्कुराहट - ______

(३) ‘संघर्ष करने वाला व्यक्ति ही जीवन में सफल होता है’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। (२)

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Chapter: [3] सच हम नहीं; सच तुम नहीं (पद्य)
Concept: सच हम नहीं; सच तुम नहीं

निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर 'सच हम नहीं सच तुम नहीं' कविता का रसास्वादन कीजिए:

  1. रचनाकार का नाम      [1]
  2. पसंद की पंक्तियाँ       [1]
  3. पसंद आने के कारण        [2]
  4. कविता की केंद्रीय कल्पना      [2]
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Chapter: [3] सच हम नहीं; सच तुम नहीं (पद्य)
Concept: सच हम नहीं; सच तुम नहीं

निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर लगभग ८० से १०० शब्दों में लिखिए।

‘आदर्श बदला’ कहानी के शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए।

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Chapter: [4] आदर्श बदला
Concept: आदर्श बदला

गुरु नानक जी की रचनाओं के नाम लिखिए।

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Chapter: [5] (अ) गुरुबानी (आ) वृंद के दोहे (पद्य)
Concept: गुरुबानी

जीवन के अनुभवों और वास्तविकता से परिचित कराने वाले वृंद जी के दोहों का रसास्वादन कीजिए।

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Chapter: [5] (अ) गुरुबानी (आ) वृंद के दोहे (पद्य)
Concept: वृंद के दोहे

दोहा छंद की विशेषताएँ बताइए।

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Chapter: [5] (अ) गुरुबानी (आ) वृंद के दोहे (पद्य)
Concept: वृंद के दोहे

निम्नलिखित पद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

तेरी गति मिति तूहै जाणहि किआ को आखि वखाणै
तू आपे गुपता, आपे परगटु, आपे सभि रंग माणै
साधिक सिध, गुरू बहु चेले खोजत फिरहि फुरमाणै
मागहि नामु पाइ इह भिखिआ तेरे दरसन कउ कुरबाणै
अबिनासी प्रभि खेलु रचाइआ, गुरमुखि सोझी होई।
नानक सभि जुग आपे वरतै, दूजा अवरु न कोई ।।

गगन मै थालु रवि चंदु दीपक बने।
तारिका मंडल जनक मोती।
धूपु मलआनलो, पवणु चवरो करे,
सगल बनराइ फूलंत जोती।
कैसी आरती होई।। भव खंडना, तेरी आरती।
अनहता सबद वाजंत भेरी ।।

(१) कृति पूर्ण कीजिए: (२)

(२) उचित मिलान कीजिए: (२)

(१) ईश्वर काल
(२) आकाश प्रभु
(३) समय खोजता
(४) खोज गगन

(३) ‘विद्यार्थी जीवन में गुरु का महत्व’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। (२)

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Chapter: [5] (अ) गुरुबानी (आ) वृंद के दोहे (पद्य)
Concept: गुरुबानी

निम्नलिखित मुद्दों के आधार पर 'गुरुबानी' कविता का रसास्वादन कीजिए:

  1. रचनाकर का नाम (१) -
  2. पसंद की पंक्तियाँ (१) -
  3. पसंद आने के कारण (२) -
  4. कविता की केंद्रीय कल्पना (२) -
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Chapter: [5] (अ) गुरुबानी (आ) वृंद के दोहे (पद्य)
Concept: गुरुबानी
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