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स्काउट परेड करते समय लेखक स्वयं को महत्त्वपूर्ण ‘आदमी’ फौजी जवान समझने लगता था। कथन के आलोक में अपने विचार प्रकट करते हुए बताइए कि विद्यालय जीवन में प्रशिक्षण व गतिविधियों की क्या उपयोगिता है?

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प्रश्न

स्काउट परेड करते समय लेखक स्वयं को महत्त्वपूर्ण ‘आदमी’ फौजी जवान समझने लगता था। कथन के आलोक में अपने विचार प्रकट करते हुए बताइए कि विद्यालय जीवन में प्रशिक्षण व गतिविधियों की क्या उपयोगिता है?

संक्षेप में उत्तर
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उत्तर

लेखक गुरदयाल सिंह फौज़ी बनना चाहता था। उसने फुल बूट और शानदार वर्दी पहने लेफ्ट-राइट करते फौज़ी जवानों की परेड को देखा था। इसी कारण स्काउट परेड के समय धोबी की धुली वर्दी, पालिश किए बूट तथा जुराबों को पहन वह स्वयं को फौज़ी जवान ही समझता था। जब मास्टर प्रीतमचंद स्काउट की परेड करवाते राईट टर्न या लेफ्ट टर्न या अबाऊट टर्न कहते तब लेखक छोटे-छोटे बूटों की एडियों पर दाएँ-बाएँ या एकदम पीछे मुड़कर बूटों की ठक-ठक करते और अकड़कर चलते। उस समय लेखक को महसूस होता कि वे विद्यार्थी नहीं बल्कि बहुत महत्वपूर्ण 'आदमी' या फिर फ़ौजी जवान' हैं। वास्तव में विद्यालयी जीवन में इस तरह की गतिविधियाँ बहुत महत्वपूर्ण हैं। इससे बच्चों को जीवन में कुछ बनने या करने की प्रेरणा मिलती है। प्रत्येक विद्यार्थी को अपने कर्तव्य का ज्ञान होता है।

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सपनों के-से दिन
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