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मैंने समझा स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है पाठ से

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प्रश्न

मैंने समझा स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है पाठ से 

एक पंक्ति में उत्तर
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उत्तर

लोकमान्य टिळक के मन में उठ रही स्वराज्य की भावना का महत्त्व समझने के साथ ही राजनीति, धर्म, स्वशासन आदि के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

shaalaa.com
उपयोजित / रचनात्मक लेखन (लेखन कौशल)
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अध्याय 2.7: स्‍वराज्‍य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है - उपयोजित लेखन [पृष्ठ ४४]

APPEARS IN

बालभारती Hindi Sulabhbharati Standard 8 Maharashtra State Board
अध्याय 2.7 स्‍वराज्‍य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है
उपयोजित लेखन | Q (२) | पृष्ठ ४४

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“कोई काम छोटा नहीं। कोई काम गंदा नहीं। कोई भी काम नीचा नहीं। कोई काम असंभव भी नहीं कि व्यक्ति ठान ले और ईश्वर उसकी मदद न करे। शर्त यही है कि वह काम, काम का हो। किसी भी काम के लिए ‘असंभव’, ‘गंदा’ या ‘नीचा’ शब्द मेरे शब्दकोश में नहीं है।” ऐसी वाणी बोलने वाली मदर टेरेसा को कोढ़ियों की सेवा करते देखकर एक बार एक अमेरिकी महिला ने कहा, “मैं यह कभी नहीं करती।” मदर टेरेसा के उपरोक्त संक्षिप्त उत्तर से वह महिला शर्म से सिकुड़ गई थी। सचमुच ऐसे कार्य का मूल्य क्या धन से आँका जा सकता है या पैसे देकर किसी की लगन खरीदी जा सकती है? यह काम तो वही कर सकता है, जो ईश्वरीय आदेश समझकर अपनी लगन इस ओर लगाए हो। जो गरीबों, वंचितों, जरूरतमंदों में ईश्वरीय उपासना का मार्ग देखता हो और दुखी मानवता में उसके दर्शन करता हो। ईसा, गांधी, टेरेसा जैसे परदुखकातर, निर्मल हृदयवाले लोग ही कोढ़ियों और मरणासन्न बीमारों की सेवा कर सकते हैं और ‘निर्मल हृदय’ जैसी संस्थाओं की स्थापना करते हैं।

Write a composition in approximately 400 words in Hindi of the topic given below:

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