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मान लीजिए कि f , g : R → R क्रमश: f (x) = 2x + 1 तथा g (x) = x2 – 2, ∀ x ∈ R द्वारा परिभाषित हैं, तो g o f ज्ञात कीजिए।

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प्रश्न

मान लीजिए कि f , g : R → R क्रमश: f (x) = 2x + 1 तथा g (x) = x2 – 2, ∀ x ∈ R द्वारा परिभाषित हैं, तो g o f ज्ञात कीजिए।

योग
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उत्तर

दिया गया है, f(x) = 2x + 1 और g(x) = x2 – 2, ∀ x ∈ R

तब (gof)x = g(f(x)} = g(2x + 1) = (2x + 1)2 – 2

= 4x2 + 4x + 1 - 2

= 4x2 + 4x - 1

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संबंध एवं फलन
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अध्याय 1: संबंध एव फलन - प्रश्नावली [पृष्ठ १२]

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एनसीईआरटी एक्झांप्लर Mathematics [Hindi] Class 12
अध्याय 1 संबंध एव फलन
प्रश्नावली | Q 3 | पृष्ठ १२

संबंधित प्रश्न

मान लीजिए कि A = {0, 1, 2, 3} तथा A में एक संबंध R निम्नलिखित प्रकार से परिभाषित कीजिए:

R = {(0, 0), (0, 1), (0, 3), (1, 0), (1, 1), (2, 2), (3, 0), (3, 3)}

क्या R स्वतुल्य, सममित, संक्रामक है?


समुच्चय A = {1, 2, 3}, के लिए एक संबंध निचे लिखे अनुसार परिभाषित कीजिए:

R = {(1, 1), (2, 2), (3, 3), (1, 3)}

उन क्रमित युग्मों को लिखिए जिनको R में जोड़ने से वह न्यूनतम (छोटे से छोटा) तुल्यता संबंध बन जाए।


मान लीजिए कि f : R → R, f (x) = 4x – 3 ∀ x ∈ R द्वारा परिभषित एक फलन है, तो f –1 लिखिए।


यदि f = {(5, 2), (6, 3)} तथा g = {(2, 5), (3, 6)}, तो f तथा g के परिसर लिखिए।


यदि A = {1, 2, 3} तथा f, g, A × A के उप-समुच्चय के संग निम्नलिखित प्रकार सूचित संबंध हैं

f = {(1, 3), (2, 3), (3, 2)}

g = {(1, 2), (1, 3), (3, 1)}

f तथा g में से कौन फलन है और क्यों?


प्राकृत संख्याओं के समुच्चय N में m * n = g.c.d (m, n), m, n ∈ N द्वारा द्वि-आधारी- संक्रिया * परिभाषित कीजिए।क्या संक्रिया * कर्मविनिमेय तथा साहचर्य है?


मान लीजिए कि f(x) = |x| + x तथा g(x) = x – x ∀ x ∈ R द्वारा परिभाषित f, g: R → R दो फलन हैं, तो f o g तथा g o f  ज्ञात कीजिए।


मान लीजिए कि R प्राकृत संख्याओं के समुच्चय N में एक संबंध है, जो nRm यदि n विभाजित करता है m को, द्वारा परिभाषित है, तो R


अवयवों वाले समुच्चय A पर विचार कीजिए। A से स्वयं A पर एकैकी आच्छादक फलनों की कुल संख्या ______ है।


मान लीजिए कि N प्राकृत संख्याओं का समुच्चय है, तो a * b = a + b, ∀ a, b ∈ N द्वारा N में परिभाषित द्वि-आधारी संक्रिया * के लिए तत्समक अवयव है।


मान लीजिए कि f: R → R फलन f(x) = 2x – 3 ∀ x ∈ R द्वारा परिभाषित है। f–1 लिखिए।


क्या g = {(1, 1), (2, 3), (3, 5), (4, 7)} एक फलन है? यदि g, g (x) = αx + β द्वारा वर्णित है, तो α तथा β का मान क्या निर्धारित होना चाहिए?


यदि A = {1, 2, 3, 4}, तो A में निम्लिखित गुण वाले संबंध को परिभाषित कीजिए:

स्वतुल्य तथा संक्रामक हों किंतु सममित नहीं हों।


यदि A = {1, 2, 3, 4}, तो A में निम्लिखित गुण वाले संबंध को परिभाषित कीजिए:

सममित हों परन्तु न तो स्वतुल्य हों और न संक्रामक हों।


मान लीजिए कि A = R – {3}, B = R – {1}, मान लीजिए कि f : A → B, f (x) = `(x - 2) /(x - 3)` ∀ x ∈ A द्वारा परिभाषित है, तो सिद्ध कीजिए कि f एकैकी आच्छादी है।


मान लीजिए A = [-1, 1]। तो विचार कीजिए कि क्या A में परिभाषित निम्नलिखित फलन एकैकी, आच्छादक या एकैकी आच्छादी हैं:

h(x) = x|x|


मान लीजिए A = {1, 2, 3, ... 9} तथा A ×A में (a, b)] (c, d) के लिए (a, b) R (c, d) यदि और केवल यदि a + d = b + c द्वारा परिभाषित R एक संबंध हैं। सिद्ध कीजिए कि R एक तुल्यता संबंध है तथा तुल्यता-वर्ग [(2, 5)] भी प्राप्त (ज्ञात) कीजिए।


फलन f , g: R → R क्रमशः f(x) = x2 + 3x + 1 तथा g(x) = 2x - 3 द्वारा परिभाषित हैं, तो g o f ज्ञात कीजिए:


किसी परिवार में बच्चों के अरिक्त समुच्चय तथा aRb, यदि a भाई है b का, द्वारा परिभाषित संबंध R पर विचार कीजिए, तो R ______


माना लीजिए कि A = {1, 2, 3, ...n} तथा B = {a, b}। तो A से B में आच्छादी प्रतिचित्रों (प्रतिचित्रणों) की संख्या _________ है।


मान लीजिए f: R → R, f(x) = `1/x` x ∈ R द्वारा परिभाषित है, तो f ______ है।


मान लीजिए f: R → R f(x) = x3 + 5 द्वारा परिभाषित एक फलन है, तो f–1(x)  ______ है।


मान लीजिए f: N → R f(x) = `(2x - 1)/2` द्वारा परिभाषित एक फलन है तथा g: Q → R g(x) = x + 2 द्वारा परिभाषित एक अन्य फलन है। तो (g o f) ` 3/2` ______ है।


मान लीजिए कि f: R → R, f(x) = `x/sqrt(1 + x^2)` द्वारा परिभाषित है, तो ( f o f o f ) (x) = ______।


एक पूर्णांक m एक अन्य पूर्णांक n से संबंधित कहालाता है, यदि m, एक पूर्णांकीय गुणज है n का। Z में इस प्रकार का संबंध स्वतुल्य, सममित तथा संक्रामक होता है।


समुच्चय A = {1, 2, 3} में R = {{1, 1), (1, 2), (2, 1), (3, 3)} प्रकार से परिभाषित संबंध R स्वतुल्य, सममित तथा संक्रामक है।


किसी समुच्चय में किसी द्वी-आधारी संक्रिया का तत्समक अवयव सदैव होता है।


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