हिंदी

कोष्ठक में दी हुई क्रिया की सहायता से रिक्त स्थान की पूर्ति करो। स्त्रीलिंग: हम हिंदी ______ (पढ़) - Hindi (हिंदी)

Advertisements
Advertisements

प्रश्न

कोष्ठक में दी हुई क्रिया की सहायता से रिक्त स्थान की पूर्ति करो। स्त्रीलिंग:

हम हिंदी ______ (पढ़)

रिक्त स्थान भरें
Advertisements

उत्तर

हम हिंदी पढ़ते हैं

shaalaa.com
बातचीत
  क्या इस प्रश्न या उत्तर में कोई त्रुटि है?
अध्याय 15: बातचीत - अभ्यास [पृष्ठ ८१]

APPEARS IN

एनसीईआरटी Hindi - Durva Part 1 Class 6
अध्याय 15 बातचीत
अभ्यास | Q 3. 2. 3. | पृष्ठ ८१

संबंधित प्रश्न

कारण लिखिए :

शिवानी जी को पाठकों से प्रशंसा प्राप्त हुई है ______ 


कारण लिखिए :

शिवानी जी लेखिका बन गईं ______ 


‘परिवेश का प्रभाव व्यक्‍तित्‍व पर होता है’ आपके विचार लिखिए।


पढ़ो और बोलो

सहेली       विद्यालय बुद्धि का खेल कभी-कभी सीखना व्यायाम
सुबह     भागना चाचा जी अंत्याक्षरी दिन में  याद करना
मामा जी     चैतरै शाम को दौड़ना अध्यापिका प्रधान डाकघर  

पढ़ो और समझो

  पुल्लिंग  स्त्रीलिंग
मैं पढ़ता हूँ।
गाता हूँ।
 पढ़ती हूँ।
गाती हूँ।
तुम    खेलते हो।
खाते हो।
खेलती हो।
खाती हो।
हम    सीखते हैं। सीखती हो।
आप  सुनते हैं। सुनती हो।

पढ़ो और समझो

सिखाना - पढ़ाना    ठीक - गलत   
सहेली - सखी कल - आज
व्यायाम - कसरत सुबह - शाम को
मस्तिष्क - दिमाग जाना - आना

कोष्ठक में दी हुई क्रिया की सहायता से रिक्त स्थान की पूर्ति करो।

पुल्लिंग:

मैं दूध ______ (पी) 


कोष्ठक में दी हुई क्रिया की सहायता से रिक्त स्थान की पूर्ति करो स्त्रीलिंग:

मैं गाना ______ (सीख)


कोष्ठक में दी हुई क्रिया की सहायता से रिक्त स्थान की पूर्ति करो। स्त्रीलिंग:

तुम कबड्डी ______ (खेल) 


नमूने के अनुसार वाक्य बदलो।

नमूना: मैं शरबत पीता हूँ।
मैं चाय नहीं पीता।

शीला गाना गाती है।(नाचना)


नमूने के अनुसार वाक्य बदलो।

नमूना: मैं शरबत पीता हूँ।
मैं चाय नहीं पीता।

पिता जी सवेरे टहलते हैं। (तैरते)


मैं सुबह ______ उठता हूँ।


मैं सुबह ______ स्कूल जाता हूँ।


हम दिन में ______ खाते हैं।


तुम्हारा विद्यालय कहाँ है?


अध्यापिका हिंदी कैसे पढ़ाती हैं? 


अंत्याक्षरी खेलना क्यों चाहता है? 


निम्नलिखित गदयांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :

दुर्गा प्र. नौटियालः  आपने अब तक काफी साहित्‍य रचा है। क्‍या आप इससे संतुष्‍ट हैं? 
शिवानी: जहाँ तक संतुष्‍ट होने का संबंध है, मैं समझती हूँ कि किसी को भी अपने लेखन से संतुष्‍ट नहीं होना चाहिए। मैं चाहती हूँ कि ऐसे लक्ष्य को सामने रखकर कुछ ऐसा लिखूँ कि जिस परिवेश को पाठक ने स्‍वयं भोगा है, उसे जीवंत कर दूँ। मुझे तब बहुत ही अच्छा लगता है जब कोई पाठक मुझे लिख भेजता है कि आपने अमुक-अमुक चरित्र का वास्‍तविक वर्णन किया है अथवा फलाँ-फलाँ चरित्र, लगता है, हमारे ही बीच है। लेकिन साथ ही मैं यह मानती हूँ कि लोकप्रिय होना न इतना आसान है और न ही उसे बनाए रखना आसान है। मैं गत पचास वर्षों से बराबर लिखती आ रही हूँ। पाठक मेरे लेखन को खूब सराह रहे हैं। मेरे असली आलोचक तो मेरे पाठक हैं, जिनसे मुझे प्रशंसा और स्‍नेह भरपूर मात्रा में मिलता रहा है। शायद यही कारण है कि मैं अब तक बराबर लिखती आई हूँ।
  1. कृति पूर्ण कौजिए:   (2)



  2. 'परिवेश का प्रभाव व्यक्तित्व पर होता है' विषय 25 से 30 शब्दों अपने विचार लिखिए।   (2)

Share
Notifications

Englishहिंदीमराठी


      Forgot password?
Use app×