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प्रश्न
संजाल पूर्ण कीजिए :

सारिणी
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उत्तर
शिवानी जी की भाषा की विशेषताएँ :
- क्लिष्ट
- वाक्यविन्यास लंबे
- सामाजिक
- संस्कृतनिष्ठ
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बातचीत
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संबंधित प्रश्न
एक-दो शब्दों में उत्तर लिखिए :
शिवानी का वास्तविक नाम - ______
पढ़ो और बोलो
| सहेली | विद्यालय | बुद्धि का खेल | कभी-कभी | सीखना | व्यायाम |
| सुबह | भागना | चाचा जी | अंत्याक्षरी | दिन में | याद करना |
| मामा जी | चैतरै | शाम को दौड़ना | अध्यापिका | प्रधान डाकघर |
नमूने के अनुसार वाक्य बदलो।
नमूना: मैं शरबत पीता हूँ।
मैं चाय नहीं पीता।
मोहन क्रिकेट खेलता है। (फुटबाल)
नमूने के अनुसार वाक्य बदलो।
नमूना: मैं शरबत पीता हूँ।
मैं चाय नहीं पीता।
पिता जी सवेरे टहलते हैं। (तैरते)
नमूने के अनुसार वाक्य बदलो।
नमूना: मैं शरबत पीता हूँ।
मैं चाय नहीं पीता।
माताजी जी रोज़ दूध पीती हैं। (चाय)
नमूने के अनुसार वाक्य बदलो।
नमूना: मैं शरबत पीता हूँ।
मैं चाय नहीं पीता।
वे बच्चे शाम को खेलते हैं। (पढ़ना)
हम सुबह ______ स्नान करते हैं।
अध्यापिका हिंदी कैसे पढ़ाती हैं?
शोभा कौन-से खेल खेलती है?
निम्नलिखित गदयांश पढ़कर दी गई सूचनाओं के अनुसार कृतियाँ कीजिए :
| दुर्गा प्र. नौटियालः | आपने अब तक काफी साहित्य रचा है। क्या आप इससे संतुष्ट हैं? |
| शिवानी: | जहाँ तक संतुष्ट होने का संबंध है, मैं समझती हूँ कि किसी को भी अपने लेखन से संतुष्ट नहीं होना चाहिए। मैं चाहती हूँ कि ऐसे लक्ष्य को सामने रखकर कुछ ऐसा लिखूँ कि जिस परिवेश को पाठक ने स्वयं भोगा है, उसे जीवंत कर दूँ। मुझे तब बहुत ही अच्छा लगता है जब कोई पाठक मुझे लिख भेजता है कि आपने अमुक-अमुक चरित्र का वास्तविक वर्णन किया है अथवा फलाँ-फलाँ चरित्र, लगता है, हमारे ही बीच है। लेकिन साथ ही मैं यह मानती हूँ कि लोकप्रिय होना न इतना आसान है और न ही उसे बनाए रखना आसान है। मैं गत पचास वर्षों से बराबर लिखती आ रही हूँ। पाठक मेरे लेखन को खूब सराह रहे हैं। मेरे असली आलोचक तो मेरे पाठक हैं, जिनसे मुझे प्रशंसा और स्नेह भरपूर मात्रा में मिलता रहा है। शायद यही कारण है कि मैं अब तक बराबर लिखती आई हूँ। |
- कृति पूर्ण कौजिए: (2)
- 'परिवेश का प्रभाव व्यक्तित्व पर होता है' विषय 25 से 30 शब्दों अपने विचार लिखिए। (2)


