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प्रश्न
कवि रैदास ने ‘हरिजीउ’ किसे कहा है? काव्यांश के आधार पर ‘हरिजीउ’ की विशेषताएँ लिखिए।
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उत्तर
कवि रैदास ने ‘हरिजीउ’ कहकर अपने आराध्य प्रभु को संबोधित किया है। कवि का मानना है कि उनके हरिजीउ के बिना माज के कमजोर समझे जाने को कृपा, स्नेह और प्यार कर ही नहीं सकता है। ऐसी कृपा करने वाला कोई और नहीं हो । सकता। समाज के अछूत समझे जाने वाले, नीच कहलाने वालों को ऊँचा स्थान और मान-सम्मान दिलाने का काम कवि के ‘हरिजीउ’ ही कर सकते हैं। उसके ‘हरजीउ’ की कृपा से सारे कार्य पूरे हो जाते हैं।
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निम्नलिखित प्रश्न के उत्तर दीजिए:
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संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए −
गाता शुक जब किरण बसंत
छूती अंग पर्ण से छनकर
संदर्भ सहित व्याख्या कीजिए −
हुई न क्यों में कडी गीत की
विधना यों मन में गुनती है
प्रकृति अपने विभिन्न क्रिया-कलापों से मनुष्य को प्रभावित करती है। ‘गीत-अगीत’ कविता के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
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निम्नलिखित में अभिव्यक्त व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए:
पगड़ी भी आदमी की उतारे है आदमी
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‘आदमी नामा’ कविता में आदमी की किन-किन अनुकरणीय एवं मानवीय प्रवृत्तियों का उल्लेख किया गया है?
निम्नलिखित प्रश्न का उत्तर दीजिए :
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उदाहरण के आधार पर पाठ में आए निम्नलिखित शब्दों के प्रचलित रूप लिखिए −
उदाहण : कोय − कोई , जे - जो
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ज्यों |
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कछु |
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नहिं |
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कोय |
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धनि |
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आखर |
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जिय |
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थोरे |
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होय |
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माखन |
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तरवारि |
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सींचिबो |
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मूलहिं |
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पिअत |
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पिआसो |
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बिगरी |
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आवे |
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सहाय |
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ऊबरै |
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बिनु |
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बिथा |
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अठिलैहैं |
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परिजाय |
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जैसे चितवत चंद चकोरा’ के माध्यम से रैदास ने क्या कहना चाहा है?
रैदास ने अपने ‘लाल’ की किन-किन विशेषताओं का उत्लेख किया है?
