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‘हरिहर काका’ कहानी वृद्धों के प्रति संवेदनहीन होते समाज की कथा है।' इस कथन को कहानी के आधार पर उदाहरण सहित सिद्ध कीजिए।

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प्रश्न

‘हरिहर काका’ कहानी वृद्धों के प्रति संवेदनहीन होते समाज की कथा है।' इस कथन को कहानी के आधार पर उदाहरण सहित सिद्ध कीजिए।

लघु उत्तरीय
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उत्तर

'हरिहर काका' कहानी जीवन की वास्तविकता को उजागर करती है। यह कहानी पारिवारिक अशांति, बुजुर्गों के अपमान और उनके मन के असंतोष जैसे कटु सत्यों को सामने लाती है। ऐसी प्रवृत्तियाँ हमारे समाज के लिए हानिकारक हैं, क्योंकि ये समाज के नैतिक मूल्यों का ह्रास करती हैं।

हरिहर काका के परिवार में उनके भाई केवल उनकी जमीन के लालच में उनके साथ संबंध बनाए हुए थे। इसी लालच में उनके भाइयों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया। अपने भाइयों का ऐसा व्यवहार हरिहर काका के लिए अविश्वसनीय और पीड़ादायक था। बुजुर्गों के प्रति इस प्रकार का असंवेदनशील व्यवहार समाज की संवेदनहीनता को दर्शाता है। इस कहानी में समाज में मतलबी और धोखापन पहलुओं की ओर आकर्षित करती है, हमें यह देखने को मिलता है, जीवन में रिश्ते केवल पैसों पर ही आधारित होते हैं। 

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हरिहर काका
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कल भी उनके यहाँ गया था, लेकिन न तो वह कल ही कुछ कह सके और न आज ही। दोनों दिन उनके पास मैं देर तक बैठा रहा, लेकिन उन्होंने कोई बातचीत नहीं की। जब उनकी तबीयत के बारे में पूछा तब उन्होंने सिर उठाकर एक बार मुझे देखा फिर सिर झुकाया तो दुबारा मेरी ओर नहीं देखा। हालाँकि उनकी एक ही नज़र बहुत कुछ कह गई। जिन यंत्रणाओं के बीच वह घिरे थे और जिस मनःस्थिति में जी रहे थे, उसमें आँखें ही बहुत कुछ कह देती हैं, मँहु खोलने की ज़रूरत नहीं पड़ती।

हरिहर काका की पंद्रह बीघे ज़मीन उनके लिए जी का जंजाल बन गई। कथन के आलोक में अपने विचार व्यक्त कीजिए।


लोगों के बीच बहस छिड़ जाती है। उत्तराधिकारी के कानून पर जो जितना जानता है, उससे दस गुना अधिक उगल देता है। फिर भी कोई समाधान नहीं निकलता। रहस्य खत्म नहीं होता, आंशकाएँ बनी ही रहती हैं। लेकिन लोग आशंकाओं को नजरअंदाज कर अपनी पक्षधरता शुरू कर देते हैं।

हरिहर काका सभी के लिए चर्चा का केंद्र बने हुए थे। हरिहर काका मामले में गाँव वालों की राय तर्कसहित स्पष्ट कीजिए।


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