भक्तिन के आ जाने से महादेवी अधिक देहाती कैसे हो गईं?
[10] महादेवी वर्मा : भक्तिन
Chapter: [10] महादेवी वर्मा : भक्तिन
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आलो आँधारि की नायिका और लेखिका बेबी हालदार और भक्तिन के व्यक्तित्व में आप क्या समानता देखते हैं?
[10] महादेवी वर्मा : भक्तिन
Chapter: [10] महादेवी वर्मा : भक्तिन
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भक्तिन की बेटी के मामले में जिस तरह का फ़ैसला पंचायत ने सुनाया, वह आज भी कोई हैरतअंगेज़ बात नहीं है। अखबारों या टी.वी. समाचारों में आनेवाली किसी ऐसी ही घटना को भक्तिन के उस प्रसंग के साथ रखकर उस पर चर्चा करें।
[10] महादेवी वर्मा : भक्तिन
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पाँच वर्ष की वय में ब्याही जानेवाली लड़कियाँ में सिर्फ़ भक्तिन नहीं है, बल्कि आज भी हज़ारों अभागिनियाँ हैं। बाल-विवाह और उम्र के अनमेलपन वाले विवाह की अपने आस-पास हो रही घटनाओं पर दोस्तों के साथ परिचर्चा करें।
[10] महादेवी वर्मा : भक्तिन
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महादेवी जी इस पाठ में हिरनी सोना, कुत्ता बसंत, बिल्ली गोधूलि आदि के माध्यम से पशु- पक्षी को मानवीय संवेदना से उकेरने वाली लेखिका के रूप में उभरती हैं। उन्होंने अपने घर में और भी कई पशु-पक्षी पाल रखे थे तथा उन पर रेखाचित्र भी लिखे हैं। शिक्षक की सहायता से उन्हें ढूँढ़कर पढ़ें। जो मेरा परिवार नाम से प्रकाशित है।
[10] महादेवी वर्मा : भक्तिन
Chapter: [10] महादेवी वर्मा : भक्तिन
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नीचे दिए गए विशिष्ट भाषा-प्रयोग के उदाहरण को ध्यान से पढ़िए और इसकी अर्थ-छवि स्पष्ट कीजिए-
पहली कन्या के दो संस्करण और कर डाले
[10] महादेवी वर्मा : भक्तिन
Chapter: [10] महादेवी वर्मा : भक्तिन
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नीचे दिए गए विशिष्ट भाषा-प्रयोग के उदाहरण को ध्यान से पढ़िए और इसकी अर्थ-छवि स्पष्ट कीजिए-
खोटे सिक्कों की टकसाल जैसी पत्नी
[10] महादेवी वर्मा : भक्तिन
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नीचे दिए गए विशिष्ट भाषा-प्रयोग के उदाहरण को ध्यान से पढ़िए और इसकी अर्थ-छवि स्पष्ट कीजिए-
अस्पष्ट पुनरावृत्तियाँ और स्पष्ट सहानुभूतिपूर्ण
[10] महादेवी वर्मा : भक्तिन
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‘बहनोई’ शब्द ‘बहन (स्त्री.) + ओई’ से बना है। इस शब्द में हिंदी भाषा की एक अनन्य विशेषता प्रकट हुई है। पुंलिंग शब्दों में कुछ स्त्री-प्रत्यय जोड़ने से स्त्रीलिंग शब्द बनाने की एक समान प्रकिया कई भाषाओं में दिखती है, पर स्त्रीलिंग शब्द में कुछ पुं. प्रत्यय जोड़कर पुंलिंग शब्द बनाने की घटना प्रायः अन्य भाषाओं में दिखलाई नहीं पड़ती है। यहाँ पुं. प्रत्यय ‘ओई’ हिंदी की अपनी विशेषता है। ऐसे कुछ और शब्द उनमें लगे पुं. प्रत्ययों की हिंदी तथा और भाषाओं में खोज करें।
[10] महादेवी वर्मा : भक्तिन
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पाठ में आए लोकभाषा के इस संवाद को समझकर इसे खड़ी बोली हिंदी में ढालकर प्रस्तुत कीजिए।
ई कउन बड़ी बात आय। रोटी बनाय जानित है, दाल राँध लेइत है, साग-भाजी छँउक सकित है, अउर बाकी का रहा।
[10] महादेवी वर्मा : भक्तिन
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भक्तिन पाठ में पहली कन्या के दो संस्करण जैसे प्रयोग लेखिका के खास भाषाई संस्कार की पहचान कराता है, साथ ही ये प्रयोग कथ्य को संप्रेषणीय बनाने में भी मददगार हैं। वर्तमान हिंदी में भी कुछ अन्य प्रकार की शब्दावली समाहित हुई है। नीचे कुछ वाक्य दिए जा रहे हैं जिससे वक्ता की खास पसंद का पता चलता है। आप वाक्य पढ़कर बताएँ कि इनमें किन तीन विशेष प्रकार की शब्दावली का प्रयोग हुआ है? इन शब्दावलियों या इनके अतिरिक्त अन्य किन्हीं विशेष शब्दावलियों का प्रयोग करते हुए आप भी कुछ वाक्य बनाएँ और कक्षा में चर्चा करें कि ऐसे प्रयोग भाषा की समृद्धि में कहाँ तक सहायक है?
- अरे! उससे सावधान रहना! वह नीचे से ऊपर तक वायरस से भरा हुआ है। जिस सिस्टम में जाता है उसे हैंग कर देता है।
- घबरा मत! मेरी इनस्वींगर के सामने उसके सारे वायरस घुटने टेकेंगे। अगर ज़्यादा फ़ाउल मारा तो रेड कार्ड दिखा के हमेशा के लिए पवेलियन भेज दूँगा।
- जानी टेंसन नई लेने का वो जिस स्कूल में पढ़ता है अपुन उसका हैडमास्टर है।
[10] महादेवी वर्मा : भक्तिन
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बाज़ार का जादू चढ़ने और उतरने पर मनुष्य पर क्या-क्या असर पड़ता है?
[11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
Chapter: [11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
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बाज़ार में भगत जी के व्यक्तित्व का कौन-सा सशक्त पहलू उभरकर आता है? क्या आपकी नज़र में उनका आचरण समाज में शांति-स्थापित करने में मददगार हो सकता है?
[11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
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‘बाज़ारूपन’ से क्या तात्पर्य है?
[11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
Chapter: [11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
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बाज़ार किसी का लिंग, जाति, धर्म या क्षेत्र नहीं देखता; वह देखता है सिर्फ़ उसकी क्रय शक्ति को। इस रूप में वह एक प्रकार से सामाजिक समता की भी रचना कर रहा है। आप इससे कहाँ तक सहमत हैं?
[11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
Chapter: [11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
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आप अपने तथा समाज से कुछ ऐसे प्रसंग का उल्लेख करें-
जब पैसा शक्ति के परिचायक के रूप में प्रतीत हुआ।
[11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
Chapter: [11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
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आप अपने तथा समाज से कुछ ऐसे प्रसंग का उल्लेख करें-
जब पैसे की शक्ति काम नहीं आई।
[11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
Chapter: [11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
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बाज़ार दर्शन पाठ में बाज़ार जाने या न जाने के संदर्भ में मन की कई स्थितियों का ज़िक्र आया है। आप इस स्थिति से जुड़े अपने अनुभव का वर्णन कीजिए।
मन खाली हो
[11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
Chapter: [11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
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बाज़ार दर्शन पाठ में किस प्रकार के ग्राहकों की बात हुई है? आप स्वयं को किस श्रेणी का ग्राहक मानते/मानती हैं?
[11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
Chapter: [11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
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आप बाज़ार की भिन्न-भिन्न प्रकार की संस्कृति से अवश्य परिचित होंगे। मॉल की संस्कृति और सामान्य बाज़ार और हाट की संस्कृति में आप क्या अंतर पाते हैं? पर्चेज़िंग पावर आपको किस तरह के बाज़ार में नज़र आती है?
[11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
Chapter: [11] जैनेन्द्र कुमार : बाज़ार दर्शन
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