'वह लता वहीं की, जहाँ कली तू खिली' पंक्ति के द्वारा किस प्रसंग को उद्घाटित किया गया है?
[1.02] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : (क) गीत गाने दो मुझे, (ख) सरोज स्मृति
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निम्नलिखित पंक्ति का अर्थ स्पष्ट कीजिए -
नत नयनों से लोक उतर
[1.02] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : (क) गीत गाने दो मुझे, (ख) सरोज स्मृति
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निम्नलिखित पंक्ति का अर्थ स्पष्ट कीजिए -
श्रृंगार रहा जो निराकार
[1.02] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : (क) गीत गाने दो मुझे, (ख) सरोज स्मृति
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निम्नलिखित पंक्ति का अर्थ स्पष्ट कीजिए -
पर पाठ अन्य यह, अन्य कला
[1.02] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : (क) गीत गाने दो मुझे, (ख) सरोज स्मृति
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निम्नलिखित पंक्ति का अर्थ स्पष्ट कीजिए-
[1.02] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : (क) गीत गाने दो मुझे, (ख) सरोज स्मृति
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'सरोज स्मृति' पूरी पढ़कर आम आदमी के जीवन-संघर्षों पर चर्चा कीजिए।
[1.02] सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' : (क) गीत गाने दो मुझे, (ख) सरोज स्मृति
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'सागर' और 'बूँद' से कवि का क्या आशय है?
[1.03] सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' : (क) यह दीप अकेला, (ख) मैंने देखा, एक बूँद
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'रंग गई क्षणभर, ढलते सूरज की आग से' - पंक्ति के आधार पर बूँद के क्षणभर रंगने की सार्थकता बताइए।
[1.03] सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' : (क) यह दीप अकेला, (ख) मैंने देखा, एक बूँद
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'सूने विराट के सम्मुख ............ दाग से!'- पंक्तियों का भावार्थ स्पष्ट कीजिए।
[1.03] सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' : (क) यह दीप अकेला, (ख) मैंने देखा, एक बूँद
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'क्षण के महत्त्व' को उजागर करते हुए कविता का मूल भाव लिखिए।
[1.03] सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' : (क) यह दीप अकेला, (ख) मैंने देखा, एक बूँद
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बच्चे का उधर-उधर कहना क्या प्रकट करता है?
[1.04] केदारनाथ सिंह : (क) बनारस, (ख) दिशा
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'मैं स्वीकार करूँ, मैंने पहली बार जाना हिमालय किधर है' - प्रस्तुत पंक्तियों का भाव स्पष्ट कीजिए।
[1.04] केदारनाथ सिंह : (क) बनारस, (ख) दिशा
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सत्य क्या पुकारने से मिल सकता है? युधिष्ठिर विदुर को क्यों पुकार रहे हैं- महाभारत के प्रसंग से सत्य के अर्थ खोलें।
[1.05] विष्णु खरे : (क) एक कम, (ख) सत्य
Chapter: [1.05] विष्णु खरे : (क) एक कम, (ख) सत्य
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सत्य का दिखना और ओझल होना से कवि का क्या तात्पर्य है?
[1.05] विष्णु खरे : (क) एक कम, (ख) सत्य
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सत्य और संकल्प के अंतर्संबंध पर अपने विचार व्यक्त कीजिए।
[1.05] विष्णु खरे : (क) एक कम, (ख) सत्य
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'युधिष्ठिर जैसा संकल्प' से क्या अभिप्राय है?
[1.05] विष्णु खरे : (क) एक कम, (ख) सत्य
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कविता में बार-बार प्रयुक्त 'हम' कौन है और उसकी चिंता क्या है?
[1.05] विष्णु खरे : (क) एक कम, (ख) सत्य
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सत्य की राह पर चल। अगर अपना भला चाहता है तो सच्चाई को पकड़।– इन पंक्तियों के प्रकाश में कविता का मर्म खोलिए।
[1.05] विष्णु खरे : (क) एक कम, (ख) सत्य
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आप सत्य को अपने अनुभव के आधार पर परिभाषित कीजिए।
[1.05] विष्णु खरे : (क) एक कम, (ख) सत्य
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'ईमानदारी और सत्य की राह आत्म सुख प्रदान करती है' इस विषय पर कक्षा में परिचर्चा कीजिए।
[1.05] विष्णु खरे : (क) एक कम, (ख) सत्य
Chapter: [1.05] विष्णु खरे : (क) एक कम, (ख) सत्य
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