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HSC Science (General) 12th Standard Board Exam - Maharashtra State Board Important Questions

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निम्नलिखित वाक्य का कोष्ठक में दी गई सूचनाओं के अनुसार काल परिवर्तन कीजिए:

सत्य का मार्ग सरल है। (सामान्य भविष्यकाल)

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Chapter: [19] भाषा अध्ययन (व्याकरण)
Concept: क्रिया के काल (काल परिवर्तन)

निम्नलिखित वाक्य का कोष्ठक में दी गई सूचनाओं के अनुसार काल परिवर्तन कीजिए:

मैं वहाँ जाकर मौसी को देख अति दुखी हो गया। (पूर्ण भूतकाल)

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Chapter: [19] भाषा अध्ययन (व्याकरण)
Concept: क्रिया के काल (काल परिवर्तन)

निम्नलिखित मुहावरे का अर्थ लिखकर उचित वाक्य में प्रयोग कीजिए:

दिन दूना रात चौगुना बढ़ना।

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Chapter: [19] भाषा अध्ययन (व्याकरण)
Concept: मुहावरे और कहावतें

निम्नलिखित वाक्य को शुद्ध करके वाक्य फिर से लिखिए:

उनकी व्यथा के सघनता जानने का मुझे एक अवसर मिली है।

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Chapter: [19] भाषा अध्ययन (व्याकरण)
Concept: वाक्य शुद्‍धीकरण

निम्नलिखित वाक्य को शुद्ध करके वाक्य फिर से लिखिए:

सुधारक आते हैं, जिवन की इन विडंबनाओं पर घनघोर चोट करते हैं।

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Chapter: [19] भाषा अध्ययन (व्याकरण)
Concept: वाक्य शुद्‍धीकरण

निम्नलिखित वाक्य को शुद्ध करके वाक्य फिर से लिखिए:

यहाँ स्वभाविक रूप से सवाल उठता है की इस्तेमाल में आने वाले इन यौगिकों का आखिर होता क्या है।

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Chapter: [19] भाषा अध्ययन (व्याकरण)
Concept: वाक्य शुद्‍धीकरण

निम्नलिखित वाक्य का कोष्ठक में दी गई सूचनाओं के अनुसार काल परिवर्तन कीजिए:

मैं पढ़-लिखकर नौकरी करने लगा। (पूर्ण भूतकाल)

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Chapter: [19] भाषा अध्ययन (व्याकरण)
Concept: क्रिया के काल (काल परिवर्तन)

निम्नलिखित वाक्य का कोष्ठक में दी गई सूचनाओं के अनुसार काल परिवर्तन कीजिए:

उनका जमा किया हुआ रुपया समाप्त हो गया। (सामान्य भविष्यकाल)

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Chapter: [19] भाषा अध्ययन (व्याकरण)
Concept: क्रिया के काल (काल परिवर्तन)

निम्नलिखित वाक्य का कोष्ठक में दी गई सूचनाओं के अनुसार काल परिवर्तन कीजिए:

बैजु हाथ बाँधकर खड़ा होगा। (सामान्य भूतकाल)

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Chapter: [19] भाषा अध्ययन (व्याकरण)
Concept: क्रिया के काल (काल परिवर्तन)

निम्नलिखित पंक्ति मैं उद्धृत अलंकार पहचानकर उनके नाम लिखिए:

उधो, मेरा हृदयतल था एक उद्यान न्यारा।
शोभा देतीं अमित उसमें कल्पना-क्यारियाँ भी।।

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Chapter: [19] भाषा अध्ययन (व्याकरण)
Concept: अलंकार

निम्नलिखित पंक्ति मैं उद्धृत अलंकार पहचानकर उनके नाम लिखिए:

चरण-कमल-सम-कोमल।

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Chapter: [19] भाषा अध्ययन (व्याकरण)
Concept: अलंकार

निम्नलिखित पंक्ति मैं उद्धृत अलंकार पहचानकर उनके नाम लिखिए:

सोहत ओढ़े पीत पट श्याम सलोने गात।
मनों नीलमनि शैल पर, आतप पर्‌यो प्रभात।।

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Chapter: [19] भाषा अध्ययन (व्याकरण)
Concept: अलंकार

निम्नलिखित वाक्य को शुद्ध करके वाक्य फिर से लिखिए:

उन्हें व्यवस्थित करने की सभी प्रयास निष्फल रहा हैं।

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Chapter: [19] भाषा अध्ययन (व्याकरण)
Concept: वाक्य शुद्‍धीकरण

निम्नलिखित वाक्य को शुद्ध करके वाक्य फिर से लिखिए:

दिलीप उच्च शिक्शा के लिए लंदन चली गया।

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Chapter: [19] भाषा अध्ययन (व्याकरण)
Concept: वाक्य शुद्‍धीकरण

निम्नलिखित वाक्य को शुद्ध करके वाक्य फिर से लिखिए:

तापमान बडने से ध्रुवों पर जमी हुई विशाल बर्फ राशी पिघलने के समाचार भी आ रहे हैं।

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Chapter: [19] भाषा अध्ययन (व्याकरण)
Concept: वाक्य शुद्‍धीकरण
निम्नलिखित वाक्य को शुद्ध करके वाक्य फिर से लिखिए:
लोगों ने देखा ओर हैरान रह गया।
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Chapter: [19] भाषा अध्ययन (व्याकरण)
Concept: वाक्य शुद्‍धीकरण

निम्नलिखित मुहावरे का अर्थ लिखकर उचित वाक्य में प्रयोग कीजिए:

हवा लगना

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Chapter: [19] भाषा अध्ययन (व्याकरण)
Concept: मुहावरे और कहावतें

निम्नलिखित मुहावरे के अर्थ लिखकर उचित्त वाक्य में प्रयोग कीजिए:

शक्ल पर बारह बजना।

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Chapter: [19] भाषा अध्ययन (व्याकरण)
Concept: मुहावरे और कहावतें

निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

           रविशंकर जी भारत के जाने-माने सितार वादक व शास्त्रीय संगीतज्ञ हैं। उन्होंने बोटल्स व विशेष तौर पर जॉर्ज हैरीसन के सहयोग से भारतीय शास्त्रीय संगीत को, विदेशों तक पहुँचाने में अहम भूमिका निभाई थी।

           उनका जन्म ०७ अप्रैल, १९२० को वाराणसी में हुआ। उनके बड़े भाई उदयशंकर एक प्रसिद्ध शास्त्रीय नर्तक थे। प्रारंभ में रविशंकर जी उनके साथ विदेश यात्राओं पर जाते रहे व कई नृत्य-नाटिकाओं में अभिनय भी किया।

           १९३८ में उन्होंने नृत्य कों छोड़कर संगीत को अपना लिया व मेहर घराने के उस्ताद अलाउद्‌दीन खाँ से सितार वादन का प्रशिक्षण लेने लगे। १९४४ में अपनो प्रशिक्षण समाप्त करने के बाद, उन्होंने आई. पी. टी. ए. में दाखिला लिया व बैले के लिए सुमधुर धुनें बनाने लगे। वे ऑल इंडिया रेडियो में वाद्‌यवृंद प्रमुख भी रहे।

           १९५४ में उन्होंने सर्वप्रथम सोवियत यूनियन में पहला विदेशी प्रदर्शन दिया। फिर एडिनबर्ग फेस्टिवल के अतिरिक्त रॉयल फे. स्टिवल हॉल में भी प्रदर्शन किया। १९६० के दर्शक में ब्रीटल्स के साथ काम करके उन्होंने भारतीय शास्त्रीय संगीत की धूम विदेशों तक पहुँचा दी।

           वे १९८६ से १९९२ तक राज्य सभा के मनोनीत सदस्य रहे। १९९९ में उन्हें भारतरत्न से सम्मानित, किया गया। उन्हें पद्मविभूषण, मैग्सेसे, ग्रेमी, क्रिस्टल तथा फूकुओका आदि अनेक पुरस्कार भी प्राप्त हुए।

           उनकी पुत्री अनुष्का का जन्म १९८२ में, लंदन में हुआ। अनुष्का का पालन-पोषण दिल्‍ली व न्यूयार्क में हुआ। अनुष्काने पिता से सितार वादन सीखा व अल्प आयु में ही अच्छा कैरियर बना लिया। वे बहुप्रतिभाशाली कलाकर हैं। उन्होंने पिता को समर्पित करते हुए एक पुस्तक लिखी- ‘बापी, द लव ऑफ माई लाईफ।’ इसके अतिरिक्त उन्होंने एक फिल्म में भरतनाट्यम नर्तकी का रोल भी अदा किया।

           पंडित रविशंकर जी ने अनेक नए रागों की रचना की। सन्‌ २००० में उन्हें तीसरी बार ग्रेमी-पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पंडित जी ने सही मायने में पूर्व तथा पश्चिमी संगीत के मध्य एक से हेतु कायम किया है। दिसंबर २०१२ में उनका स्वर्गवास हुआ।

(१) तालिका पूर्ण कीजिए: (२)

रविशंकर जी को प्राप्त पुरस्कार

(१)  
 
(२)   
 
(३)  
 
(४)  

(२) निम्नलिखित शब्दों का लिंग परिवर्तन कीजिए: (२)

  1. नर्तक - ______
  2. माता - ______
  3. पंडिताईन - ______
  4. पुत्र - ______

(३) ‘संगीत का जीवन में महत्व’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। (२)

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Chapter: [20] अपठित विभाग
Concept: अपठित गद्यांश

निम्नलिखित अपठित गद्यांश पढ़कर सूचना के अनुसार कृतियाँ पूर्ण कीजिए:

          एक बार अंग्रेजी के मशहूर साहित्यसेवी डॉ. जॉनसन के पास उनका एक मित्र आया और अफसोस जाहिर करने लगा कि उसे धार्मिक ग्रंथ पढ़ने के लिए समय ही नहीं मिलता।

          “क्यों?” डॉ. जॉनसन ने फौरन पूछा।

           “आप ही देखिए, दिन-रात मिलाकर सिर्फ चौबीस घंटे होते हैं, इसमें से आठ घंटे तो सोने में निकल जाते हैं।”

          “पर यह बात सब ही के लिए लागू है।” डॉ. जॉनसन ने कहा।

          “और करीब आठ ही घंटे ऑफिस में काम करना पड़ता है।”

           “और बाकी आठ घंटे?” डॉ. जॉनसन ने पूछा।

          “इन्हीं आठ घंटों में खाना-पीना, हजामत बनाना, नहाना-धोना, ऑफिस आना-जाना, मित्रों से मिलना-जुलना, चिट्ठी-पत्री का जबाब देना, इत्यादि कितने काम रहते हैं। मैं तो बड़ा परेशान हूँ।”

          “तब तो मुझे भी अब भूखों मरना पड़ेगा।” डॉ. जॉनसन एक गहरी साँस लेकर बोले।

          “क्यों? क्यों?” उनके मित्र ने तुरंत पूछा।

          “मैं काफी खाने वाला आदमी हूँ और अन्न उपजाने के लिए दुनिया में एक चौथाई ही तो जमीन है, तीन-चौथाई तो पानी ही है और संसार में मेरे जैसे करोड़ों लोग हैं जिन्हें अपना पेट भरना पड़ता है।”

          “पर इतने लोगों के लिए फिर तो भी जमीन काफी है।”

          “काफी कहाँ है? इस एक-चौथाई जमीन में कितने पहाड़ हैं, ऊबड़-खाबड़ स्थल हैं, नदी-नाले हैं, रेगिस्तान और बंजर भूमि हैं। अब मेरा भी कैसे निभ सकेगा भगवान! मित्र महोदय बड़ी हमदर्द के साथ डॉ. जॉनसन को दिलासा देने लगे कि उन्हे परेशान होने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। दुनिया में करोड़ों लोग रहते आए हैं और उन्हें सदा अन्न मिलता ही रहा है।”

(१) तालिका पूर्ण कीजिए: (२)

(२) परिच्छेद में आए हुए शब्दयुग्म के कोई भी चार उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए: (२)

  1. ______
  2. ______
  3. ______
  4. ______

(३) ‘समय अनमोल है’ इस विषय पर अपने विचार ४० से ५० शब्दों में लिखिए। (२)

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Chapter: [20] अपठित विभाग
Concept: अपठित गद्यांश
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