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Question
विषम बीजाणुकता की सार्थकता पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
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Solution
- विषम बीजाणुकता बीज निर्माण प्रक्रिया की शुरूआत मानी जाती है जिसके फलस्वरूप बीज का विकास हुआ। विषम बीजाणुकता ने नर एवं मादा युग्मकोभिद् के विभेदने में सहायता की तथा मादा युग्मकोभिद् जो मेगास्पोरेन्जियम के अन्दर विकसित होता है कि उत्तरजीविता बढ़ाने में सहायता की।
- मेगास्पोरैंगियम के भीतर मेगास्पोर का यह प्रतिधारण और अंकुरण युग्मनज के समुचित विकास को सुनिश्चित करता है। युग्मनज भविष्य के स्पोरोफाइट में विकसित होता है। बीज आदत का विकास मेगास्पोर की अवधारण से संबंधित है।
- इस प्रकार हेटरोस्पोरी को विकास में एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है क्योंकि यह बीज आदत का अग्रदूत है।
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उदाहरण सहित निम्नलिखित शब्दावली का संक्षिप्त वर्णन करो:
बीजाणुपर्ण
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| (A) | (B) | ||
| (a) | अनावृत बीज | (i) | एंजियोस्पर्म |
| (b) | आवृत बीज | (ii) | जिम्नोस्पर्म |
| (c) | कशाभ (फ्लेजेला) | (iii) | ब्रायोफाइटा |
| (d) | मारकेंशिया | (iv) | यूग्लीना |
| (e) | मारसीलिया | (v) | थैलोफाइटा |
| (f) | क्लेडोफोरा | (vi) | टैरिडोफाइटा |
| (g) | पेनिसिलियम | (vii) | फंजाई (कवक) |
थैलोफाइटा, ब्रायोफाइटा एवं टेरिडोफाइटा, 'क्रिप्टोगैम' कहलाते हैं। जिम्नोस्पर्म एवं एंजियोस्पर्म, 'फैनेरोगैम' कहलाते हैं। चर्चा कीजिए, क्यों? जिम्नोस्पर्म का एक उदाहरण देते हुए आरेख बनाइए।
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