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उपसहसंयोजन संख्या का क्या अर्थ है? - Chemistry (रसायन विज्ञान)

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Question

उपसहसंयोजन संख्या का क्या अर्थ है?

Short/Brief Note
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Solution

यदि परमाणुओं को गोलों के रूप में प्रदर्शित किया जाए, तब किसी विशेष गोले के सन्निकट उपस्थित अन्य गोलों की संख्या उसकी उप-सहसंयोजन संख्या कहलाती है। आयनिक क्रिस्टलों में किसी आयन के चारों ओर उपस्थित विपरीत आवेशित गोलों की संख्या उसकी उप-सहसंयोजन संख्या कहलाती है।

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क्रिस्टलीय ठोसों का वर्गीकरण
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ठोस A, अत्यधिक कठोर तथा ठोस एवं गलित अवस्थाओं में विद्युतरोधी है और अत्यन्त उच्च दाब पर पिघलता है। यह किस प्रकार का ठोस है?


समझाइए – आयनिक ठोस कठोर एवं भंगुर होते हैं।


नायोबियम का क्रिस्टलीकरण अन्तःकेन्द्रित घनीय संरचना में होता है। यदि इसका घनत्व 8.55 g cm-3 हो तो इसके परमाण्विक द्रव्यमान 93u का प्रयोग करके परमाणु त्रिज्या की गणना कीजिए।


कॉपर fcc जालक के रूप में क्रिस्टलीकृत होता है जिसके कोर की लम्बाई 3.61 x 10-8 cm है। यह दर्शाइए कि गणना किए गए घनत्व के मान तथा मापे गए घनत्व 8.92 g cm-3 में समानता है।


फेरिक ऑक्साइड में ऑक्साइड आयन के षट्कोणीय निविड़ संकुलन में क्रिस्टलीकृत होता है जिसकी तीन अष्टफलकीय रिक्तियों में से दो पर फेरिक आयन उपस्थित होते हैं। फेरिक ऑक्साइड का सूत्र ज्ञात कीजिए।


निम्नलिखित में से कौन-सा जालक (नेटवर्क) ठोस है?


आयनिक ठोसों के लिए निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य नहीं है?


निम्नलिखित में से कौन-से कथन सत्य नहीं हैं?

  1. रिक्तिका दोष से पदार्थ का घनत्व कम होता है।
  2. अंतराकाशी दोष से पदार्थ का घनत्व बढढता है।
  3. अशुद्ध दोष का पदार्थ के घनत्व पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
  4. फ्रेंकल दोष पदार्थ के घनत्व में वृद्धि का परिणाम है।

निम्नलिखित में से कौन-से दोषों से घनत्व घटता है?

  1. अन्तराकाशी दोष
  2. रिक्तिका दोष
  3. फ्रेंकेल दोष
  4. शॉट्की दोष

द्रवों तथा गैसों को तरल के रूप में वर्गीकृत क्यों किया गया है?


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