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तुम्हारी उम्र के कितने बच्चों का वज़न मिलाकर नन्दू के वज़न के बराबर होगा?

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Question

तुम्हारी उम्र के कितने बच्चों का वज़न मिलाकर नन्दू के वज़न के बराबर होगा?

Short/Brief Note
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Solution

मेरा वज़न = 25 किलो

नन्दू का वज़न = 200 किलो

उन बच्चों की संख्या जिनका कुल वजन नन्दू के वज़न में जुड़ जाएगा = `200/25` = 8

इसलिए, मेरी उम्र के 8 बच्चों का वजन मिलाकर नन्दू के वजन के बराबर होगा।

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नन्दू हाथी
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Chapter 3: नन्दू हाथी - पता करो [Page 22]

APPEARS IN

NCERT Environmental Studies - Looking Around [Hindi] Class 4
Chapter 3 नन्दू हाथी
पता करो | Q 2 | Page 22

RELATED QUESTIONS

हाथियों के झुंड का एक कोलाज बनाओ। इसके लिए तुम हाथियों के जितने चित्र इकट्ठा कर सकते हो, करो। अब उन्हें काटकर अपनी कॉपी में चिपकाओ।


पता करो और लिखो, कौन-कौन से जानवर झुंड में रहते हैं?


हाथी को चैन से बंधे होने पर कैसा महसूस होता होगा? अपनी भावना बताएँ तथा चर्चा करें। 


क्या तुमने कभी हाथी पर सवारी की है? कैसा लगा?


बगुला भैंस पर क्यों बैठा होगा?


ऐसे और जानवरों के नाम लिखो, जिन्हें हम सवारी के काम में लाते हैं।


ऐसे जानवरों के नाम लिखो, जिन्हें हम सामान ढोने के काम में लाते हैं।


नीचे दिए गए हाथी के चित्र को बड़ा करके एक मोटे कागज़ पर बनाओ। उसे अब बाहरी रेखा पर से काटो।

  • अब चित्र में जहाँ ‘काटो’ (✄) लिखा है, वहाँ थोड़ा-सा काटो। ध्यान रहे काट कर अलग मत करना।
  • जहाँ ‘मोड़ो’ लिखा है, वहाँ से बिंदु वाली रेखा (.....) पर से मोड़ लो।
  • धारी वाले हिस्से को (/////////) अंदर की ओर मोड़ दो।
  • अब पूँछ बनाकर चिपका दो।

बन गया न हाथी!

  • इसे अपनी पसंद के रंगों से और अलग-अलग तरह से सजाओ।
  • इस हाथी को अपनी कक्षा में लटकाओ। अपने साथियों के बनाए हुए हाथी भी देखो।


इन चित्रों को देखो और पढ़ो- ये जानवर आपस में क्या-क्या कह रहे हैं। इन पर संवेदनशीलता से चर्चा करें।

यह पिटारी ही अब मेरा घर बन गया है। मैं तो जंगल के जानवरों से मिलना और खुली हवा लेना मानो भूल ही गया हूँ। बस पिटारी है और यह सँपेरा!
यह मत सोचो कि मैं सर्कस में बहुत खुश हूँ। नाचो, कूदो, आग के गोले में से निकलो, और भी न जाने क्या-क्या! न करो, तो भूखे रहो और पिटाई अलग से!
तुमने मेरी दौड़ ही देखी है। मेरे पैरों के नीचे जब लोहे की नाल ठोकते हैं, तो दर्द से जान निकल जाती है।
नाचते-नाचते हमारी तो कमर ही टूट गई। मन न हो फिर भी नाचो। वह भी, खाली पेट!
म्याऊँ-म्याऊँ-म्याऊँ! लोगों के लिए कुछ भी काम नहीं करती, फिर भी बच्चे मुझे बहुत प्यार करते हैं। दूध पिलाते हैं और सहलाते भी हैं। मैं अपनी मर्ज़ी से सब जगह आती-जाती हूँ।
गुटरगूँ! गुटरगूँ! जानते हो, लोग मुझे बुला-बुलाकर बड़े प्यार से दाना खिलाते हैं।

तुमने इन जानवरों की बातें पढ़ीं। तुम्हें क्या लगता है, इनमें से कुछ उदास क्यों हैं?


इन चित्रों को देखो और पढ़ो- ये जानवर आपस में क्या-क्या कह रहे हैं। इन पर संवेदनशीलता से चर्चा करें।

यह पिटारी ही अब मेरा घर बन गया है। मैं तो जंगल के जानवरों से मिलना और खुली हवा लेना मानो भूल ही गया हूँ। बस पिटारी है और यह सँपेरा!
यह मत सोचो कि मैं सर्कस में बहुत खुश हूँ। नाचो, कूदो, आग के गोले में से निकलो, और भी न जाने क्या-क्या! न करो, तो भूखे रहो और पिटाई अलग से!
तुमने मेरी दौड़ ही देखी है। मेरे पैरों के नीचे जब लोहे की नाल ठोकते हैं, तो दर्द से जान निकल जाती है।
नाचते-नाचते हमारी तो कमर ही टूट गई। मन न हो फिर भी नाचो। वह भी, खाली पेट!
म्याऊँ-म्याऊँ-म्याऊँ! लोगों के लिए कुछ भी काम नहीं करती, फिर भी बच्चे मुझे बहुत प्यार करते हैं। दूध पिलाते हैं और सहलाते भी हैं। मैं अपनी मर्ज़ी से सब जगह आती-जाती हूँ।
गुटरगूँ! गुटरगूँ! जानते हो, लोग मुझे बुला-बुलाकर बड़े प्यार से दाना खिलाते हैं।

पेड़ों पर झूमते और लटकते बंदरों और मदारी के बंदर में तुम्हें क्या अंतर लगता है?


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