Advertisements
Advertisements
Question
सङ्ख्याः अङ्कैः लिखत।
षण्णवतिः
Advertisements
Solution
96
APPEARS IN
RELATED QUESTIONS
मञ्जूषातः समानार्थकशब्दान् विरुद्धार्थकशब्दान् चित्वा लिखत।
पुरतः × ______
सूचनानुसारं कृतीः कुरुत।
त्वं धनुः त्यज। (‘त्वं’ स्थाने ‘भवान्’ योजयत।)
सूचनानुसारं कृतीः कुरुत।
अहं प्रसन्ना भविष्यामि। (लृट् स्थाने लिङ् प्रयोगं कुरुत।)
समासविग्रहं कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
| जलव्यवस्थापनम् | ...... | ...... |
समासविग्रहं कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
| चरणविकलः | ...... | ...... |
प्रश्ननिर्माणं कुरुत।
सुगत एवाधिकतमं मूल्यं मह्यं दद्यात्।
क्रियापदतालिकां पूरयत।
| ए.व. | द्विव. | ब.व. | पुरुष: | लकार: |
| ______ | ______ | चिन्तयामहै | उत्तमः | लोट् |
समासविग्रहं कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
| पूजार्थम् | ..... | ..... |
समासविग्रहं कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
| सविनयम् | ..... | ..... |
समासविग्रहं कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
| कणादमुनिः | ..... | ..... |
समासविग्रहं कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
| परमाणुः | ..... | ..... |
समासविग्रहं कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहवाक्यम् | समासनाम |
| मदान्धः | ..... | ..... |
नामतालिकां पूरयत।
| ए.व. | द्विव. | ब.व. | विभक्तिः |
| ______ | दृग्भ्याम् | ______ | चतुर्थी |
तालिकां पूरयत।
| धातवः | अर्थः | लकारः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
| ग्रह (९ उ.) | स्वीकरोति | लट् | गृह्णामि | गृह्णीवः | ______ |
सन्धिविग्रहं कुरुत।
अद्ययावद्धि
धातु-तालिकां पूरयत।
| लकाराः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् | पुरुषः |
| लङ् | ..... | ..... | अभवन् | प्रथमः पुरुषः |
समासविग्रहं कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
| अनुत्तमानि | ..... | ..... |
समासविग्रहं कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
| वनस्पतिगतः | ..... | ..... |
समासविग्रहं कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
| गृध्रराजः | ..... | ..... |
समासविग्रहं कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
| गृहस्थः | ..... | ..... |
सूचनानुसारं कृती: कुरुत।
अम्भोदाः वसुधाम् आर्द्रयन्ति। (कर्तृपदम् एकवचने परिवर्तयत।)
सूचनानुसारं कृती: कुरुत।
______ नमः। (‘वैद्यराज’ शब्दस्य योग्यं रूपं लिखत)
सूचनानुसारं कृती: कुरुत।
राक्षसेभ्यः जनकस्य सुतां हृत्वा पुरीं ययौ। (लङ्लकारे परिवर्तयत।)
धातुसाधित-विशेषण-तालिकां पूरयत।
| धातुः | क्त | क्तवतु | कृत्याः | शतृ/शानच् |
| लिख् (६ प. प.) | लिखितः | ______ | लेखितव्यः | ______ |
पृष्ठतः ______ युवकाः गोष्ठिषु रताः।
समासविग्रहं कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
| दारपोषणरताः | ..... | ..... |
समासविग्रहं कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
| समुद्रसुता | ..... | ..... |
क्रियापद-तालिकां पूरयत।
| ए.व. | द्विव. | ब.व. | पुरुषः | लकारः |
| सहते | ______ | ______ | प्रथमः | लट् |
क्रियापदतालिकां पूरयत।
| ए.व. | द्विव. | ब.व. | पुरुषः | लकारः |
| ______ | अकुर्वाथाम् | ______ | मध्यमः | लङ् |
सङ्ख्याः अक्षरैः लिखत।
४२
सङ्ख्याः अक्षरैः लिखत।
८२
सङ्ख्याः अक्षरैः लिखत।
९२
सङ्ख्याः अक्षरैः लिखत।
८८
सङ्ख्याः अक्षरैः लिखत।
९८
समासविग्रहं कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
| भल्लूकवेषधारी | ..... | ..... |
समासविग्रहं कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
| व्याघ्रभल्लूकौ | ..... | ..... |
समासविग्रहं कुरुत।
| समस्तपदम् | विग्रहः | समासनाम |
| मानवताधर्मः | ...... | ...... |
मञ्जूषातः नामानि सर्वनामानि च पृथक्कुरुत।
| नाम | सर्वनाम |
(मञ्जूषा - मम, राजा, सः, नदी, एतस्मिन्)
