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Question
- “शतमुख-शतरव-मुखरे!”
उपर्युक्त पंक्ति के ‘शतमुख’ और ‘शतरव’ में ‘श’ वर्ण की पुनरावृत्ति हो रही है, इसीलिए यहाँ अनुप्रास अलंकार है।
- “मुकुट शुभ्र हिम- तुषार”
उपर्युक्त पंक्ति में हिमालय को भारत का मुकुट कहा गया है। वास्तव में हिमालय मुकुट नहीं है, लेकिन कवि ने कल्पना के बल पर उसे मुकुट का रूप दे दिया। इससे भारत की छवि भव्य और दिव्य बन जाती है। यहाँ गुण की अत्यंत समानता के कारण उपमेय में उपमान का अभेद स्थापित किया गया है, इसीलिए यहाँ रूपक अलंकार है।
‘रैदास के पद’ पाठ में आपने अलंकार के विषय में विस्तार से जाना – समझा है। अब निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए-
(क) कविता में जहाँ-जहाँ अनुप्रास अलंकार आया है, उन पंक्तियों को खोजकर लिखिए।
(ख) कविता की उन पंक्तियों को खोजिए जहाँ रूपक अलंकार है। साथ ही यह भी बताइए कि कवि ने किस प्राकृतिक दृश्य या वस्तु को भारत का रूप मानकर चित्रित किया है?
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Solution
(क) कविता मे अनुप्रास अलंकार के उदाहरण-
| पंक्ति | अनुप्रास का कारण |
| “कनक-शस्य-कमल धरे!” | ‘क’ ध्वनि की पुनरावृत्ति |
| “नार्जितोर्मि सागर-जल” | ‘ग’ और ‘ज’ ध्वनियों का प्रभाव |
| “तरु-तृण-वन-लता वसन” | ‘त’ और ‘व’ ध्वनियों की पुनरावृत्ति |
| “गंगा ज्योतिर्जल-कण” | ‘ज’ ध्वनि की पुनरावृत्ति |
| “प्राण प्रणव ओंकार” | ‘प्र’ ध्वनि की पुनरावृत्ति |
| “शतमुख-शतरव-मुखरे!” | ‘श’ ध्वनि की पुनरावृत्ति |
(ख)
रूपक अलंकार में उपमेय और उपमान के बीच भेद नहीं रखा जाता, बल्कि दोनों को एक ही रूप में प्रस्तुत किया जाता है। इस कविता में कवि ने भारत को माता के रूप में चित्रित करते हुए प्रकृति की मनोहारी छवि का वर्णन किया है।
| पंक्ति | रूपक अलंकार का आधार | कवि ने किसे क्या रूप दिया है? |
| “तरु-तृण-वन-लता वसन” | वृक्षों, घास, वनों और लताओं को वस्त्र के समान माना गया है। | प्रकृति की हरियाली को भारत माता के परिधान के रूप में चित्रित किया गया है। |
| “अंचल में खचित सुमन” | पुष्पों को आँचल में सजे हुए आभूषणों के रूप में दर्शाया गया है। | फूलों को भारत माता के आँचल की शोभा माना गया है। |
| “गंगा ज्योतिजल-कण/धवल धार हार गले” | गंगा की निर्मल धारा को हार के रूप में कल्पित किया गया है। | गंगा नदी को भारत माता के गले में सुशोभित सफेद हार का स्वरूप दिया गया है। |
| “मुकुट शुभ्र हिम-तुषार” | हिमालय की श्वेत हिमराशि को मुकुट के समान माना गया है। | हिमालय को भारत माता के मस्तक पर विराजमान शुभ मुकुट के रूप में प्रस्तुत किया गया है। |
कवि ने भारत को माता अथवा देवी का स्वरूप प्रदान किया है। उसकी नदियाँ, पर्वत, वन, पुष्प और खेत भारत की सुंदरता, पवित्रता तथा महानता को दर्शाते हैं।
